देश की खबरें | हमने टेंट हटा लिए हैं लेकिन दिल्ली पुलिस ने अवरोधक लगा दिए हैं : सड़क जाम पर टिकैत ने कहा

गाजियाबाद, 21 अक्टूबर राकेश टिकैत के नेतृत्व में दिल्ली- उत्तर प्रदेश की सीमा पर नवंबर 2020 से धरना दे रहे भारतीय किसान यूनियन (बीकेयू) और इसके समर्थकों ने बृहस्पतिवार को कहा कि प्रदर्शन स्थल पर अवरोधक दिल्ली पुलिस ने लगाए हैं न कि किसानों ने।

बीकेयू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहा कि गाजीपुर में प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रीय राजधानी की ओर जोन वाले एक सर्विस लेन को खाली कर दिया है, लेकिन दिल्ली पुलिस के अवरोधक अब भी वहां लगे हुए हैं।

संयुक्त किसान मोर्चे (एसकेएम) में शामिल भारतीय किसान यूनियन ने इन खबरों को भी खारिज कर दिया कि सड़कों से अवरोध हटाने पर उच्चतम न्यायालय की टिप्पणी के बाद वह गाजीपुर बार्डर खाली कर रही है।

टिकैत ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘प्रदर्शनकारियों ने अपने टेंट हटा लिए हैं लेकिन सरकार और दिल्ली पुलिस की तरफ से लगाए गए अवरोधक अब भी वहां मौजूद हैं। अन्यथा सड़क खुली है। अगर आप देखें वहां केवल पुलिस द्वारा लगाए गए अवरोधक ही पाएंगे।’’

उन्होंने कहा कि अगर पुलिस अवरोधक हटा ले तो प्रदर्शनकारी दिल्ली जाना चाहते हैं।

टिकैत ने यूपी गेट पर एक टीवी चैनल से कहा, ‘‘हमने अपने सामान हटा लिए हैं लेकिन पुलिस के कारण लोगों को परेशानी उठानी पड़ रही है।’’

इससे पहले उच्चतम न्यायालय की टिप्पणी के आलोक में गाजीपुर में कई प्रदर्शनकारी जंजीरों से बंधे लोहे के बैरीकेड को हटाने का प्रयास करते दिखे। साथ ही उन्होंने सड़कों पर खड़े ट्रैक्टर को भी किनारे कर दिया।

बीकेयू के मीडिया प्रभारी धर्मेंद मलिक ने कहा, ‘‘टेंट एवं अन्य सामान हटाकर हमने दिखाया है कि दिल्ली जाने वाली सड़कों को किसानों ने जाम नहीं किया है।’’ उन्होंने कहा कि प्रदर्शन जारी रहेगा।

न्यायमूर्ति एस. के. कौल और न्यायमूर्ति एम. एम. सुंदरेश की पीठ ने कहा, ‘‘किसानों को प्रदर्शन करने का अधिकार है लेकिन वे अनिश्चितकाल तक सड़क जाम नहीं कर सकते। आपको किसी भी तरीके से आंदोलन करने का अधिकार है लेकिन इस तरह से सड़कें बाधित नहीं की जा सकतीं। लोगों को सड़क पर चलने का अधिकार है और इसे नहीं रोका जाना चाहिए।’’

पीठ ने नोएडा निवासी मोनिका अग्रवाल की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की जिन्होंने शिकायत की थी कि प्रदर्शनकारी किसानों द्वारा सड़क जाम करने से रोज आने-जाने में विलंब होता है।

अदालत ने जनहित याचिका पर किसान संगठनों को तीन हफ्ते के अंदर जवाब देने का भी निर्देश दिया है।

दिल्ली के सिंघू, टीकरी और गाजीपुर बार्डर पर नवंबर 2020 से सैकड़ों किसान तीन कृषि कानूनों को वापस लेने और फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य बरकरार रखने की मांग करते हुए धरना दे रहे हैं।

प्रदर्शन शुरू होने के बाद से ही दिल्ली, हरियाणा और उत्तर प्रदेश को जोड़ने वाले मुख्य मार्ग प्रभावित हैं।

इससे पहले बीकेयू के प्रवक्ता सौरभ उपाध्याय ने ‘पीटीआई-’ से कहा, ‘‘हम उच्चतम न्यायालय के आदेश का सम्मान करते हैं। हम यह भी स्पष्ट करना चाहते हैं कि दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन स्थल पर अवरोधक लगाए हैं। हम यह भी मांग करते हैं कि दिल्ली पुलिस को अब उन्हें जनता के कल्याण के लिए हटा देना चाहिए।’’

(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)