देश की खबरें | वायनाड: भूस्खलन प्रभावितों ने भोजन पैकेट में कीड़े होने का आरोप लगाया, डीवाईएफआई ने प्रदर्शन किया

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. वायनाड जिले के चूरलमाला-मुंडकई में भूस्खलन प्रभावित लोगों ने मेप्पाडी ग्राम पंचायत द्वारा दिए गए भोजन पैकेट में कीड़े होने का बृहस्पतिवार को आरोप लगाया। इसके बाद डेमोक्रेटिक यूथ फेडरेशन ऑफ इंडिया (डीवाईएफआई) ने विरोध-प्रदर्शन किया

वायनाड (केरल), सात नवंबर वायनाड जिले के चूरलमाला-मुंडकई में भूस्खलन प्रभावित लोगों ने मेप्पाडी ग्राम पंचायत द्वारा दिए गए भोजन पैकेट में कीड़े होने का बृहस्पतिवार को आरोप लगाया। इसके बाद डेमोक्रेटिक यूथ फेडरेशन ऑफ इंडिया (डीवाईएफआई) ने विरोध-प्रदर्शन किया

मेप्पाडी पंचायत कांग्रेस नीत संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) द्वारा शासित है।

राज्य सरकार ने ऐलान किया कि जरूरत पड़ने पर घटना की जांच की जाएगी। मामले को गंभीरता से लेते हुए राज्य खाद्य आयोग ने जिला अधिकारियों से रिपोर्ट मांगी है।

भोजन पैकेट में कथित तौर पर कीड़े होने के विरोध में डीवाईएफआई के कार्यकर्ताओं ने शुरुआत में धरना दिया, लेकिन सुबह करीब साढ़े ग्यारह बजे उस वक्त तनाव बढ़ गया जब कार्यकर्ताओं ने पुलिस की घेराबंदी तोड़कर पंचायत अध्यक्ष के कक्ष में प्रवेश किया। इसके बाद स्थिति तनावपूर्ण हो गई।

डीवाईएफआई, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) की युवा शाखा है।

सत्तारूढ़ सदस्यों ने कहा कि जनप्रतिनिधियों को घटना की जानकारी नहीं थी। उन्होंने इस मुद्दे को आधिकारिक स्तर पर विफलता बताया। हालांकि, प्रदर्शनकारियों को पुलिस अधिकारियों और पंचायत सदस्यों ने रोका जिसके बाद झड़प हुई।

पंचायत अधिकारियों के अनुसार, झड़प में पंचायत अध्यक्ष के. बाबू और चार अन्य सदस्य घायल हो गए, जिन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

इससे पहले, शिकायतें मिली थीं कि मेप्पाडी ग्राम पंचायत द्वारा भूस्खलन पीड़ितों को वितरित पैकेट में कीड़े लगे चावल, रवा और आटा था।

इसके बाद, डीवाईएफआई कार्यकर्ताओं ने बृहस्पतिवार को इस मुद्दे को उजागर करने के लिए पंचायत कार्यालय के सामने दूषित चावल रखकर धरना दिया।

डीवाईएफआई कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ द्वारा शासित स्थानीय निकाय के सदस्यों ने उनके साथ मारपीट की। हालांकि, यूडीएफ सदस्यों ने दावा किया कि प्रदर्शनकारियों ने पंचायत अध्यक्ष के कार्यालय में जबरन घुसने की कोशिश की और उनके खिलाफ जातिवादी टिप्पणी की।

हालांकि, पंचायत अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि राजस्व विभाग के अधिकारियों की चूक के कारण कथित तौर पर कीड़े वाले भोजन के पैकेट वितरित हुए।

उन्होंने ईएमएस हॉल में भी विरोध प्रदर्शन किया, जहां पंचायत भोजन पैकेट रखती है। डीवाईएफआई नेताओं ने आरोप लगाया कि पंचायत अधिकारियों ने बिना वितरित किए ही भोजन के पैकेट हॉल में रख दिए। उन्होंने बताया कि पैकेट में मौजूद कई खाद्य पदार्थ की समयावधि निकल चुकी थी।

जब पुलिस ने पंचायत कार्यालय में विरोध प्रदर्शन कर रहे भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के कार्यकर्ताओं को रोका तो एक बार फिर तनाव बढ़ गया। स्थिति तब और बिगड़ गई जब पुलिस अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों को जबरन वहां से हटा दिया।

इस बीच, पंचायत अधिकारियों ने दावा किया कि उन्होंने केवल राजस्व विभाग और अन्य धर्मार्थ संगठनों द्वारा दान किए गए भोजन के पैकेट वितरित किए थे।

पंचायत के एक सदस्य ने कहा, ‘‘हम पिछले तीन माह से बिना किसी समस्या के भोजन के पैकेट बांट रहे हैं। कथित पैकेट जिलाधिकारी कार्यालय द्वारा भेजे गए थे और शिकायत 29 अक्टूबर को की गई। चूंकि उपचुनाव के दौरान यह घटना सामने आई है ऐसे में इस घटना के पीछे कोई न कोई राज जरूर है।’’

राजस्व अधिकारियों ने आश्वासन दिया कि बृहस्पतिवार से भोजन के ताजा पैकेट वितरित किए जाएंगे जिसके बाद धरना समाप्त हुआ।

मामले को लेकर राजस्व मंत्री के राजन ने कहा कि विभाग की ओर से कोई गलती नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर राज्य सरकार इस मामले की जांच करेगी।

उन्होंने कहा, ‘‘यह मामला चौंकाने वाला है। हालांकि, प्रभावितों को वितरित चावल राजस्व विभाग द्वारा वितरित नहीं किया गया था। विभाग ने आखिरी बार 31 अक्टूबर और एक नवंबर को आपूर्ति की थी। सरकार प्रत्येक परिवार को 52 किलोग्राम चावल की आपूर्ति कर रही है, जो 26 किलोग्राम के पैकेट में उपलब्ध कराए जा रहे हैं। जो चावल और मैदा मिले हैं वे छोटे पैकेट में थे।’’

कांग्रेस नेता एवं कलपेट्टा विधायक टी सिद्दीकी ने कहा, ‘‘खाद्य सुरक्षा विभाग गुणवत्ता परीक्षण करने के लिए जिम्मेदार है। राजस्व विभाग ने बिना किसी जांच के ही खाद्य पदार्थ, आवश्यक वस्तुएं, यहां तक ​​कि कपड़े भी पंचायत को सौंप दिए।’’

केरल राज्य खाद्य आयोग ने घटना पर रिपोर्ट मांगी है। आयोग के अध्यक्ष ने अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट को मामले की तत्काल जांच करने और उसी दिन ईमेल द्वारा रिपोर्ट भेजने का निर्देश दिया।

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