नयी दिल्ली, 28 दिसंबर जल शक्ति मंत्रालय की इस वर्ष की महत्वपूर्ण उपलब्धियों में 10 करोड़ ग्रामीण परिवारों को नल से स्वच्छ जल प्रदान करना और 1.42 लाख गांवों को खुले में शौच से मुक्त होने का दर्जा मिलना, केन बेतवा नदी जोड़ो परियोजना की शुरूआत जैसे कदम शामिल रहे।
सात राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों में शत प्रतिशत ग्रामीण परिवारों को नल से जल कनेक्शन प्रदान किया गया। हालांकि 10 राज्य एवं केंद्र शासित प्रदेशों में यह प्रतिशत 50 प्रतिशत से भी कम रहा। झारखंड में यह 24 प्रतिशत और लक्षद्वीप में शून्य प्रतिशत रहा।
वर्ष 2022 में 2,12,38,629 घरों को नल से स्वच्छ जल प्रदान किया गया जिससे नल से जल कनेक्शन वाले ग्रामीण परिवारों की संख्या बढ़कर 10,78,51,019 हो गई।
सरकार ने वर्ष 2024 तक सभी ग्रामीण परिवारों को नल से जल कनेक्शन प्रदान करने का वादा किया है। ग्रामीण भारत में ऐसे 19,36,06,464 परिवारों को चिन्हित किया गया है।
वहीं, 1,42,799 गांवों को ‘‘खुले में शौच से मुक्त प्लस’’ (ओडीएफ प्लस) घोषित किया गया है। इस संबंध में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले राज्यों में मध्य प्रदेश, कर्नाटक, उत्तर प्रदेश, तेलंगाना और ओडिशा शामिल हैं जहां अधिकांश संख्या में ओडीएफ प्लस घोषित गांव हैं।
ओडीएफ प्लस गांव का दर्जा ऐसे गांव को दिया जाता है जो ठोस एवं तरल कचरा प्रबंधन और साफ सफाई पर ध्यान देकर ओडीएफ का दर्जा बरकरार रखते हैं।
स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के तहत वर्ष 2019-20 से 2022-23 के दौरान 2.02 करोड़ परिवार शौचालय और 1.97 लाख सामुदायिक सफाई परिसर का निर्माण किया गया ।
इसके अलावा राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन ने इस वर्ष अर्थ गंगा कार्यक्रम को गति प्रदान की। इसके तहत गंगा नदी के तटीय क्षेत्रों में टिकाऊ विकास मॉडल के आधार पर आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा दिया गया ।
अर्थ गंगा के तहत गंगा नदी में नालों से गिरने वाले गंदे जल को शोधित करके बेचने की पहल की गई है। इसके तहत शोधित जल इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड को बेचा जाना तय हुआ है।
नमामि गंगे कार्यक्रम के तहत 406 परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है और इस वर्ष तक इनमें से 224 परियोजनाएं पूरी हो गई है जो कुल मंजूर परियोजना का 55 प्रतिशत है।
वहीं, महत्वाकांक्षी नदी जोड़ो परियोजना के तहत पहली परियोजना के रूप में केन बेतवा नदी को जोड़ने की परियोजना भी इस वर्ष शुरू हुई । केन बेतवा नदी जोड़ो परियोजना को लागू करने के लिए विशेष उद्देश्यीय कंपनी (एसपीवी) का गठन किया गया है।
इस परियोजना से मध्य प्रदेश के बुंदेलखंड और उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र के 12 जिलों को पानी मिलेगा। मध्य प्रदेश में छतरपुर, पन्ना, टीकमगढ़, सागर, दमोह, दतिया, विदिशा, शिवपुरी जिलों को पानी मिलेगा, वहीं उत्तर प्रदेश के बांदा, महोबा, झांसी और ललितपुर जिलों को राहत मिलेगी। इससे 10.62 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सालभर सिंचाई हो सकेगी, 62 लाख लोगों को पेयजल आपूर्ति संभव होगी तथा 103 मेगावाट बिजली पैदा की जा सकेगी।
इस वर्ष अगस्त में भारत और बांग्लादेश के बीच संयुक्त नदी आयोग की 38वीं मंत्री स्तरीय बैठक हुई। इसमें नदियों के जल साझा करने, बाढ़ के आंकड़े आदान प्रदान करने सहित आपसी हितों से जुड़े द्विपक्षीय मुद्दों पर चर्चा की गई।
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