देश की खबरें | लक्ष्मी नगर से विस्थापित हुए परिवारों को पानी, बिजली आपूर्ति आदि उपलब्ध कराया जाए : उच्च न्यायालय
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नयी दिल्ली, 24 जुलाई दिल्ली उच्च न्यायालय ने पूर्वी दिल्ली के लक्ष्मी नगर स्थित बाजार क्षेत्र से हाल ही में अतिक्रमण हटाने के लिए की गई कार्रवाई में विस्थापित हुए परिवारों के लिए उचित स्वच्छता सुविधाओं के साथ ही बिजली एवं पानी की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
अदालत ने दिल्ली की आम आदमी पार्टी सरकार और इसके अंतर्गत आने वाले शहरी आश्रय सुधार बोर्ड (डीयूएसआईबी) को यह सुविधाएं उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।
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इन विस्थापित परिवारों को एक स्कूल में स्थानांतरित किया गया है।
उच्च न्यायालय ने दिल्ली सरकार और डीयूएसआईबी को विस्थापित लोगों के बीच कोविड-19 के प्रसार की रोकथाम के लिए उचित उपाय सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए।
कुछ विस्थापित लोगों की ओर से दायर एक याचिका पर न्यायमूर्ति नजमी वजीरी ने यह निर्देश दिए। याचिका में दावा किया गया कि तोड़-फोड़ की कार्रवाई के बाद अब वे बेघर हैं और वर्तमान के मानसून मौसम ने उनकी परेशानी बढ़ा दी है।
उन्होंने अदालत के समक्ष वह तस्वीरें भी पेश कीं, जिनमें तोड़-फोड़ की कार्रवाई के बाद इसके मलबे के बीच ही लोग तिरपाल की आड़ में बैठे हैं।
तस्वीरें देखने के बाद अदालत ने पूर्वी दिल्ली नगर निगम (ईडीएमसी) को निर्देश दिया कि '' 48 घंटे के अंदर पूरे मलबे को साफ किया जाए'' और निर्देश के अनुपालन की तस्वीरें दाखिल की जाएं।
ईडीएमसी के स्थायी वकील तुषार सन्नू को निर्देश देने के दौरान उच्च न्यायालय ने कहा, '' सभी तस्वीरें दिखाती हैं कि अभी भी व्यापक मलबा गली और फुटपाथ पर बिखरा हुआ है। घरों को तोड़े जाने का उद्देश्य तब तक अधूरा है, जब तक गली को तत्काल लोगों के उपयोग के लायक नहीं बना दिया जाता।''
ईडीएमसी ने छह से आठ जुलाई के बीच अतिक्रमण हटाने का अभियान चलाया था।
दशकों से उस स्थान पर परिवार समेत निवास कर रहे याचिकाकर्ताओं ने रहने के लिए वैकल्पिक आवास का भी अनुरोध किया।
इस मुद्दे पर दिल्ली सरकार ने कहा कि वैकल्पिक आवास के लिए याचिकाकर्ताओं की पात्रता अभी तक निर्धारित नहीं की गई थी लेकिन इस बारे में इनके आवेदन पर विचार किया जाएगा।
वहीं, डीयूएसआईबी ने सुनवाई के दौरान अदालत को आश्वस्त किया कि स्कूल के शौचालयों की नियमित तौर पर साफ-सफाई की जाएगी और पानी एवं बिजली की निर्बाध आपूर्ति उपलब्ध करायी जाएगी।
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