नयी दिल्ली, 29 नवंबर राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने राज्य में ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन में पंजाब में हुई प्रगति के बारे में राज्य के मुख्य सचिव को नियमित रूप से छमाही सत्यापन योग्य रिपोर्ट जमा करने का निर्देश दिया है।
कचरा प्रबंधन में खामियों का जिक्र करते हुए एनजीटी ने इससे पूर्व ठोस एवं तरल कचरा शोधन एवं समाधान में नाकामी को लेकर राज्य पर 2,080 करोड़ रुपये का पर्यावरण जुर्माना लगाया था।
पिछले साल सितंबर में पारित आदेश में अधिकरण ने संबंधित अधिकारियों को पर्यावरण के उद्देश्य से बनाए गए एक अलग खाते में राशि जमा करने का निर्देश दिया था, जिसका उपयोग बहाली उपायों के लिए किया जाना था। एनजीटी ने उनसे अर्धवार्षिक रिपोर्ट जमा करने को भी कहा।
एनजीटी अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव की पीठ ने कहा कि अधिकरण के आदेश के अनुसार इस साल 15 मई और 20 अक्टूबर को दो प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की गईं, लेकिन छह-मासिक रिपोर्ट दाखिल नहीं की गई।
पीठ में न्यायिक सदस्य न्यायमूर्ति सुधीर अग्रवाल और विशेषज्ञ सदस्य ए सेंथिल वेल भी शामिल थे। पीठ ने कहा कि दूसरी रिपोर्ट संतोषजनक नहीं थी क्योंकि 31.46 मीट्रिक टन पुराने कचरे का समाधान नहीं किया गया था और 32.65 करोड़ लीटर प्रति दिन (एमएलडी) सीवेज के लिए शोधन क्षमता नहीं थी।
इसमें यह भी कहा गया कि मुख्य सचिव ने पिछले साल नवंबर में सीवेज और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन में अंतर को पाटने के लिए एक समिति का गठन किया था।
अधिकरण ने कहा कि इससे मुख्य सचिव छह-मासिक प्रगति रिपोर्ट दाखिल करने के अधिकरण के आदेश का पालन करने की अपनी जिम्मेदारी से मुक्त नहीं हो गए।
एनजीअी ने कहा, ‘‘इसलिए सत्यापन योग्य प्रगति रिपोर्ट के साथ आगे की छमाही प्रगति रिपोर्ट मुख्य सचिव द्वारा दाखिल की जानी चाहिए।’’
मामले को आगे की कार्यवाही के लिए 30 मई को सूचीबद्ध किया गया है।
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