देश की खबरें | राजनीतिक जासूसी के लिए एफबीयू यूनिट के गठन के सीबीआई के दावे के बाद भाजपा एवं आप में वाकयुद्ध

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. सन् 2015 में सत्ता में आने पर आम आदमी पार्टी द्वारा राजनीतिक जासूसी के लिए फीडबैक यूनिट (एफबीयू) गठित करने का सीबीआई की एक रिपोर्ट में दावा किये जाने के बाद बुधवार को विवाद खड़ा हो गया और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया के विरूद्ध मामला दर्ज करने की मांग की।

नयी दिल्ली, आठ फरवरी सन् 2015 में सत्ता में आने पर आम आदमी पार्टी द्वारा राजनीतिक जासूसी के लिए फीडबैक यूनिट (एफबीयू) गठित करने का सीबीआई की एक रिपोर्ट में दावा किये जाने के बाद बुधवार को विवाद खड़ा हो गया और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया के विरूद्ध मामला दर्ज करने की मांग की।

पलटवार करते हुए आप ने कहा कि ‘राजनीतिक जासूसी’ में सिसोदिया के शामिल होने का भाजपा का आरोप ‘बिल्कुल झूठ’ है।

केजरीवाल सरकार ने एक बयान में दावा किया कि ये सारे मामले ‘राजनीति से प्रेरित’ हैं । उसने कहा, ‘‘ बल्कि सीबीआई और ईडी को मोदी एवं अडाणी के बीच के संदिग्ध रिश्ते की जांच करनी चाहिए जहां असली भ्रष्टाचार हुआ है।’’

केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने अपनी प्राथमिकी जांच रिपोर्ट में पाया है कि 29 सितंबर को दिल्ली मंत्रिमंडल के निर्णय से गठित एफबीयू राजनीतिक जासूसी में लगा है।

प्रदेश भाजपा अध्यक्ष विरेंद्र सचदेवा ने आरोप लगाया कि अपनी स्थापना के समय से ही आप अपने राजनीतिक विरोधियों के प्रति वैमनस्य भाव से काम कर रही है।

उन्होंने संवाददाता सम्मेलन में आरोप लगाया, ‘‘ केजरीवाल सरकार ने न केवल अपने राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों बल्कि केंद्रीय मंत्रियों, सांसदों, उपराज्यपाल कार्यालय, मीडिया घरानों, जाने -माने उद्योगपतियों और न्यायाधीशों पर भी नजर रखने के लिए एफबीयू बनाया।’’

सीबीआई ने सतर्कता विभाग को सौंपी गयी अपनी रिपोर्ट में उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया के विरूद्ध मामला दर्ज करने के लिए उपराज्यपाल की मंजूरी मांगी है क्योंकि उपराज्यपाल ही इस मामले में अधिकृत अधिकारी हैं। सिसोदिया ने एफबीयू के गठन में ‘सक्रिय भूमिका’ निभायी थी।

इस केंद्रीय एजेंसी (सीबीआई) ने एफबीयू के कामकाज में संलिप्त अन्य लोगों के विरूद्ध भी मामले दर्ज करने की उपराज्यपाल से अनुमति मांगी है।

सूत्रों ने बताया कि उपराज्यपाल वी के सक्सेना ने सिसोदिया के विरूद्ध मामला दर्ज करने के वास्ते गृह मंत्रालय के माध्यम से सीबीआई अनुरोध को राष्ट्रपति के पास भेजा है।

उन्होंने बताया कि उपराज्यपाल ने एफबीयू के तत्कालीन संयुक्त निदेशक आर के सिन्हा, उसके अधिकारियों प्रदीप कुमार पुंज और सतीश खेत्रपा के विरूद्ध मामला दर्ज करने के संबंध में सबीआई की सिफारिश गृहमंत्रालय को भेजी है। उन्होंने कहा कि तत्कालीन सतर्कता निदेशक सुकेश कुमार जैन (आईआरएस अधिकारी) के विरूद्ध मुकदमा चलाने की मंजूरी वित्त मंत्रालय से आयेगी।

सूत्रों ने बताया कि वैसे मुख्यमंत्री के सलाहकार गोपाल मोहन के खिलाफ मामला दर्ज करने के लिए उपराज्यपाल ने मंजूरी दे दी है।

आप ने एक बयान में कहा , ‘‘ समूचा देश जानता है कि राजनीतिक जासूसी मोदी कर रहे हैं न कि मनीष सिसोदिया। मनीष सिसोदिया नहीं, बल्कि मोदी के विरूद्ध प्राथमिकी दर्ज की जानी चाहिए।’’

सीबीआई रिपोर्ट में कहा गया है कि एफबीयू को दिल्ली सरकार के विभिन्न विभागों के कामकाज पर कार्रवाई योग्य फीडबैक जुटाने तथा ‘‘फंसाने योग्य ’ मामले भी बनाने का जिम्मा दिया गया था।

एफबीयू ने फरवरी, 2016 में काम करना शुरू किया था और ‘गोपनीय सेवा व्यय’ के तहत उसके लिए एक करोड़ रुपये रखा गया था।

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