देश की खबरें | मतदाताओं को ही तय करना है कि क्या चुनावी तोहफे की पेशकश व्यवहार्य हैं: चुनाव आयोग
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. निर्वाचन आयोग ने उच्चतम न्यायालय से कहा है कि चुनाव के पहले या बाद में चुनावी तोहफे की पेशकश करना या बांटना संबद्ध पार्टी का एक नीतिगत मामला है। साथ ही, क्या इस तरह की नीतियां वित्तीय रूप से व्यवहार्य हैं या उनका प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा, इस पर उस राज्य के मतदाताओं को फैसला करना होगा।
नयी दिल्ली, नौ अप्रैल निर्वाचन आयोग ने उच्चतम न्यायालय से कहा है कि चुनाव के पहले या बाद में चुनावी तोहफे की पेशकश करना या बांटना संबद्ध पार्टी का एक नीतिगत मामला है। साथ ही, क्या इस तरह की नीतियां वित्तीय रूप से व्यवहार्य हैं या उनका प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा, इस पर उस राज्य के मतदाताओं को फैसला करना होगा।
निर्वाचन आयोग ने अपने हलफनामे में कहा, ‘‘निर्वाचन आयोग राजकीय नीतियों व फैसलों का नियमन नहीं कर सकता, जो विजेता पार्टी द्वारा उस वक्त लिये जा सकते हैं जब वे सरकार गठित करेंगे। इस तरह की कार्रवाई, कानून में प्रावधान उपलब्ध किये बगैर, शक्तियों के दायरे से बाहर होंगे। ’’
आयोग ने कहा, ‘‘...यह भी बताया जाता है कि चुनाव से पहले या बाद में किसी भी चुनावी तोहफे की पेशकश/वितरण संबद्ध पार्टी का एक नीतिगत फैसला है और क्या इस तरह की नीतियां वित्तीय रूप से व्यवहार्य हैं या राज्य की आर्थिक स्थिति पर इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा, एक ऐसा सवाल है जिस पर राज्य के मतदाताओं को विचार करना होगा और निर्णय लेना होगा। ’’
निर्वाचन आयोग ने कहा कि दिसंबर 2016 में चुनाव सुधारों पर 47 प्रस्तावों का एक सेट केंद्र को भेजा गया था जो राजनीतिक दलों से जुड़े सुधारों के बारे में था। इनमें से एक अध्याय में राजनीतिक दलों के पंजीकरण समाप्त करने की बात कही गई थी।
आयोग ने यह भी कहा, ‘‘निर्वाचन आयोग ने कानून मंत्रालय को भी यह सिफारिश की थी कि उसे किसी राजनीतिक दल का पंजीकरण समाप्त करने और पंजीकरण के नियम तथा राजनीतिक दलों के पंजीकरण समाप्त करने के लिए आवश्यक आदेश जारी करने की शक्तियों का इस्तेमाल करने में सक्षम बनाया जाए।’’
आयोग ने कहा कि इस संबंध में याचिकाकर्ता अश्विनी कुमार उपाध्याय का अनुरोध है कि निर्वाचन आयोग सरकारी खजाने से चुनावी तोहफे का वादा करने/ बांटने वाले राजनीतिक दल का चुनाव चिह्न जब्त करने/पंजीकरण समाप्त करने का निर्देश दे सकता है, जबकि उच्चतम न्यायालय ने 2002 के अपने फैसले में निर्देश दिया था कि निर्वाचन आयोग के पास तीन आधार को छोड़ कर किसी राजनीतिक दल का पंजीकरण रद्द करने की कोई शक्ति नहीं है।
(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)