देश की खबरें | पीड़ित को निष्पक्ष जांच और सुनवाई का मौलिक अधिकार: न्यायालय
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. उच्चतम न्यायालय ने सोशल मीडिया में आपत्तिजनक पोस्ट को लेकर एक व्यक्ति से राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) विधायक जितेंद्र आव्हाड के बंगले पर कथित मारपीट की घटना की जांच जारी रखने का महाराष्ट्र पुलिस को शुक्रवार को निर्देश दिया और कहा कि पीड़ित को भी निष्पक्ष सुनवाई का मौलिक अधिकार है।
नयी दिल्ली, 24 फरवरी उच्चतम न्यायालय ने सोशल मीडिया में आपत्तिजनक पोस्ट को लेकर एक व्यक्ति से राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) विधायक जितेंद्र आव्हाड के बंगले पर कथित मारपीट की घटना की जांच जारी रखने का महाराष्ट्र पुलिस को शुक्रवार को निर्देश दिया और कहा कि पीड़ित को भी निष्पक्ष सुनवाई का मौलिक अधिकार है।
कथित घटना पांच अप्रैल, 2020 की रात को हुई थी।
पीड़ित की शिकायत के मुताबिक, कुछ पुलिसकर्मी उन्हें अगवा करने और महाराष्ट्र के पूर्व मंत्री के बंगले पर ले जाने में भी शामिल थे।
न्यायमूर्ति एमआर शाह और न्यायमूर्ति सीटी रविकुमार की खंडपीठ ने मामले में सीबीआई जांच का आदेश देने से इनकार करते हुए कहा कि बम्बई उच्च न्यायालय ने सीबीआई को जांच स्थानांतरित करने से इनकार करके कोई त्रुटि नहीं की है।
शीर्ष अदालत ने कहा कि जहां तक सीबीआई को जांच स्थानांतरित करने से इनकार का संबंध है, तो वह उच्च न्यायालय के दृष्टिकोण से पूरी तरह सहमत है।
पीठ ने कहा, "इसलिए, आरोप पत्र दाखिल कर देने मात्र से आगे की जांच/पुनः जांच/नये सिरे से जांच के आदेश देने में कोई अड़चन पैदा नहीं हो सकती, बशर्ते तथ्यों के आधार पर यह वांछित हो।’’
शीर्ष अदालत ने अधिकारियों को आगे की जांच करने और इसे जल्द से जल्द, आदर्श स्थिति में तीन माह के भीतर, पूरा करने का निर्देश दिया।
शिकायत के अनुसार, शहर के एक सिविल इंजीनियर अनंत करमुसे (40) के घर पर कुछ पुलिसकर्मी आये थे और उन्हें थाने साथ चलने को कहा था, लेकिन उन्हें थाने ले जाने के बजाय आव्हाड के बंगले पर ले जाया गया।
करमुसे ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया था कि मंत्री की छेड़छाड़ की गयी तस्वीर फेसबुक पर साझा करने को लेकर बंगले में उन्हें करीब 10-15 लोगों ने बुरी तरह पीटा था।
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