देश की खबरें | उपराष्ट्रपति नायडू ने लोकतंत्र में राजनीतिक विरोधियों के बीच परस्पर सम्मान की जरूरत पर जोर दिया
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नयी दिल्ली, तीन जून उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू ने लोकतंत्र में राजनीतिक विरोधियों के बीच परस्पर सम्मान की जरूरत पर जोर दिया और बहस, चर्चाओं और बातचीत को विधायी प्रक्रिया का सार बताया।
गैबॉन, सेनेगल और कतर, तीन देशों की आधिकारिक यात्रा पर गए उपराष्ट्रपति नायडू ने सेनेगल की नेशनल एसेंबली के प्रेसिडेंट (संसद के अध्यक्ष) मुस्तफा नियाजी से राजधानी डकार में हुई बातचीत के दौरान उक्त बात कही।
नायडू राज्यसभा के पदेन सभापति हैं।
उपराष्ट्रपति सचिवालय से जारी बयान के अनुसार, वार्ता के दौरान नायडू ने अमन कायम करने के लिए सभी देशों द्वारा कोशिश किए जाने की जरूरत पर जोर दिया। किसी प्रकार की समृद्धि के लिए शांति को पूर्व शर्त बताते हुए नायडू ने कहा कि भारत दुनिया में सभी मसलों के शांतिपूर्ण समाधान की वकालत करता है।
उन्होंने कहा कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है और सेनेगल अफ्रीका के सबसे स्थिर और मॉडल लोकतंत्र में से एक है, दोनों प्राकृतिक साझेदार हैं और एक-दूसरे के प्रति प्रेम भाव रखते हैं।
उन्होंने स्वतंत्रता के बाद से स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से राष्ट्रपति, संसदीय और स्थानीय चुनाव कराने के लिए सेनेगल की प्रशंसा भी की।
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