खरगोन, 12 अप्रैल मध्य प्रदेश के खरगोन शहर में रामनवमी जुलूस के दौरान हुई हिंसा के बाद रविवार से कर्फ्यू जारी रहने के बावजूद ताजा घटना में कुछ लोगों ने शहर में चार वाहनों और एक गैरेज में आग लगा दी।
हिंसा के आरोप में लगभग 100 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। वहीं, मौलवियों ने आरोप लगाया है कि राज्य प्रशासन द्वारा मुस्लिम समुदाय के लोगों को चुनिंदा रूप से लक्षित किया किया गया है।
अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक नीरज चौरसिया ने बताया कि खरगोन में रविवार शाम से कर्फ्यू है, उसके बाद भी कुछ असामाजिक तत्वों ने सोमवार रात शहर के मैकेनिक नगर इलाके में तीन बसों, एक कार और एक गैरेज में आग लगा दी।
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि रविवार को रामनवमी जुलूस के दौरान शुरू हुई हिंसा के सिलसिले में अब तक 95 लोगों को गिरफ्तार किया गया है और शहर में कानून और स्थिति नियंत्रण में है।
मौलवियों के एक प्रतिनिधिमंडल ने मंगलवार को भोपाल में प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) से मुलाकात की और आरोप लगाया कि रामनवमी पर खरगोन और सेंधवा में सांप्रदायिक झड़पों के बाद प्रशासन द्वारा मुसलमानों को चुनिंदा रूप से निशाना बनाया गया जबकि जुलूस में शामिल लोगों ने मस्जिदों की दीवारों पर भगवा झंडे लगाए और भड़काऊ नारेबाजी की।
बड़वानी जिले के सेंधवा कस्बे में रामनवमी जुलूस के दौरान पथराव की घटना सामने आई।
मौलवियों ने आरोप लगाया कि खरगोन जिला प्रशासन ने बिना किसी जांच के जल्दबाजी में की गई कार्रवाई में अल्पसंख्यक समुदाय के सदस्यों के कई घरों और संपत्तियों को ध्वस्त कर दिया, जिससे 100 से अधिक मुस्लिम परिवारों को शहर से पलायन करना पड़ा।
उन्होंने भोपाल के शहर काजी सैय्यद मुश्ताक अली के नेतृत्व में डीजीपी सुधीर सक्सेना को एक ज्ञापन सौंपा।
ज्ञापन में आरोप लगाया गया है, ‘‘मुस्लिम समुदाय के लोगों के घरों को तोड़कर और उन्हें जेलों में डालकर उन पर अत्याचार किया जा रहा है और देश के कानून का स्पष्ट उल्लंघन किया जा रहा है।’’
ज्ञापन में कहा गया है, ‘‘मध्य प्रदेश में काफी समय से अशांति पैदा करने की कोशिश की जा रही है। खरगोन और सेंधवा कस्बों में रामनवमी के अवसर पर निकाले गए जुलूसों के दौरान मस्जिदों की दीवारों पर चढ़कर भगवा झंडा फहराया गया और भड़काऊ नारे लगाए गए।’’
ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि सत्तारूढ़ पार्टी के विधायकों द्वारा ऐसे बयान दिए जा रहे हैं जिससे दंगे और भड़कें। राज्य में कहीं और ऐसी स्थिति नहीं बने और इसे रोकने के लिए डीजीपी से समय पर कार्रवाई करने का आग्रह किया गया है।
प्रमुख मुस्लिम संस्था जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने खरगोन में अल्पसंख्यक समुदाय के कथित उत्पीड़न के मुद्दे पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से हस्तक्षेप की मांग की और शहर में हिंसा की उच्च स्तरीय न्यायिक जांच की मांग की।
कई चश्मदीदों के सामने आने के बाद भी पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि खरगोन शहर में हिंसा कैसे शुरू हुई?
एक प्रत्यक्षदर्शी ने बताया कि रामनवमी का जुलूस रविवार को तालाब चौक इलाके से शुरू हुआ जिसमें डीजे सिस्टम से धार्मिक गीत बजाए जा रहे थे। चश्मदीद का दावा है कि जुलूस जब एक मस्जिद के पास से गुजरा तो जुलूस पर पथराव किया गया, जिसके परिणामस्वरुप हिंसा भड़क गयी।
एक अन्य प्रत्यक्षदर्शी ने कहा कि जुलूस निर्धारित समय से देरी से शुरू हुआ और जब वह एक मस्जिद के सामने से गुजर रहा था तब नमाज अदा करने का समय था। उन्होंने कहा कि किसी ने जुलूस पर पथराव कर दिया और बाद में स्थिति हिंसक हो गई।
इंदौर रेंज के महानिरीक्षक राकेश गुप्ता ने कहा, ‘‘ यह जांच का विषय है कि हिंसा कैसे शुरू हुई और पहले पत्थर कहां से फेंका गया? स्थिति सामान्य होने पर ही यह पता चल सकेगा। हम लोगों को इसके बारे में बताएंगे।’
खरगोन जिलाधिकारी अनुग्रह पी ने कहा, ‘‘ शहर में कर्फ्यू जारी है। लोगों को केवल अत्यावश्यक चिकित्सा जरूरतों के लिए छूट दी गई है।”
उन्होंने कहा कि कर्फ्यू के मद्देनजर खरगोन में स्नातक और स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों की परीक्षाएं स्थगित कर दी गई हैं।
एक आधिकारिक विज्ञप्ति में कहा गया है कि प्रशासन ने पथराव में शामिल कुछ लोगों को हिरासत में लिया है। प्रशासन के अनुसार, उनसे पूछताछ की जा रही है और दुकानों और घरों सहित उनकी अवैध संपत्तियों को ध्वस्त किया जा रहा है।
मध्य प्रदेश के गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने खरगोन के पुलिस अधीक्षक (एसपी) सिद्धार्थ चौधरी से भी बात की और उनके स्वास्थ्य के बारे में जानकारी ली। चौधरी को रविवार को हिंसा में गोली लगी थी।
चौधरी ने पीटीआई- से कहा, “जब मुझे आगजनी की सूचना मिली और मैं संजय नगर इलाके में पहुंचा तो तलवार लिए एक युवक मेरी तरफ दौड़ा। जब मैंने उसका पीछा किया और उससे तलवार छीनने की कोशिश की, तो मेरे अंगूठे में चोट लग गई।"
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