देश की खबरें | उत्तराखंड: विधानसभा में ‘अभद्र टिप्पणी’ कर फंसे मंत्री प्रेमचंद अग्रवाल ने इस्तीफा दिया

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. उत्तराखंड विधानसभा में ‘पहाड़-मैदान’ को लेकर ‘अभद्र टिप्पणी’ करने के कारण पिछले तीन सप्ताह से विरोध का सामना कर रहे संसदीय कार्य एवं वित्त मंत्रीप्रेम चंद अग्रवाल ने रविवार को पद से इस्तीफा दे दिया।

देहरादून, 16 मार्च उत्तराखंड विधानसभा में ‘पहाड़-मैदान’ को लेकर ‘अभद्र टिप्पणी’ करने के कारण पिछले तीन सप्ताह से विरोध का सामना कर रहे संसदीय कार्य एवं वित्त मंत्रीप्रेम चंद अग्रवाल ने रविवार को पद से इस्तीफा दे दिया।

यहां जारी एक आधिकारिक बयान के अनुसार, अग्रवाल ने यहां मुख्यमंत्री आवास में पुष्कर सिंह धामी से भेंटकर अपना इस्तीफा सौंपा।

मुख्यमंत्री ने अग्रवाल का त्यागपत्र राज्यपाल ले. जनरल गुरमीत सिंह (सेवानिवृत) को भेज दिया।

पिछले महीने राज्य विधानसभा में बजट सत्र के दौरान कांग्रेस विधायक मदन बिष्ट ने अग्रवाल के खिलाफ टिप्पणी की थी, जिस पर भड़कते हुए मंत्री ने कहा था कि क्या उत्तराखंड केवल पहाड़ के लिए बना है और क्या हमने इसी दिन के लिए आंदोलन किया था कि पहाड़ी और देसी (मैदानी) को लेकर टिप्पणियां की जाएं।

इस दौरान अग्रवाल ने अपशब्द भी कह दिया था।

ऋषिकेश विधानसभा सीट से विधायक अग्रवाल की टिप्पणी को लेकर सोशल मीडिया से लेकर प्रदेश में सड़कों तक प्रदर्शन हुआ और उनके पुतले फूंके गए।

मुख्य विपक्षी कांग्रेस और उत्तराखंड क्रांति दल (उक्रांद) ने अग्रवाल को राज्य मंत्रिमंडल से बाहर किए जाने की जोरदार मांग की थी।

हाल में प्रदेश की ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण में भी कई प्रमुख संगठनों ने अग्रवाल को मंत्रिमंडल से बर्खास्त किए जाने की मांग को लेकर जोरदार रैली निकाली थी।

अग्रवाल द्वारा अपने बयान पर खेद व्यक्त करने और प्रदेश भाजपा नेतृत्व द्वारा उन्हें सार्वजनिक जीवन में संयम बरतने व उचित शब्दावली का प्रयोग करने की कड़ी हिदायत दिए जाने के बावजूद उनके खिलाफ विरोध प्रदर्शन जारी रहे, जिससे भाजपा असहज महसूस कर रही थी।

होली से पूर्व मुख्यमंत्री धामी दिल्ली गए थे और उन्होंने पार्टी के शीर्ष नेताओं से इस मसले पर मुलाकात की थी और माना जा रहा था कि जल्द ही अग्रवाल से इस्तीफा मांगा जा सकता है।

इस्तीफा देने के बाद भावुक हुए प्रेम चंद अग्रवाल ने कहा कि जिस व्यक्ति ने प्रदेश के गठन में अहम भूमिका निभाई और लाठियां खाईं, उसे निशाना बनाया जाना ठीक नहीं है।

अग्रवाल, पृथक उत्तराखंड आंदोलन खासकर मुजफफरनगर कांड के अपने दिनों को याद करते हुए भावुक हो गये।

अग्रवाल ने इस्तीफा देने से पहले पृथक उत्तराखंड आंदोलन के दौरान अपनी भूमिका को याद किया और कहा कि दो अक्टूबर 1994 को जब मुजफफरनगर में आंदोलनकारियों पर गोलियां बरसाई गयीं तो वह फौरन दिल्ली से अकेले ट्रक में बैठकर मेरठ और फिर वहां से मुजफफरनगर में मौके पर पहुंचे और घायल आंदोलनकारियों की सहायता की।

अग्रवाल ने आंदोलन के दौरान पुलिस की लाठियां भी खाईं।

उन्होंने कहा, “जिस व्यक्ति ने उत्तराखंड को बनाने में अहम भूमिका निभाई और लाठियां खाईं, उसे निशाना बनाया जाना ठीक नहीं है।”

अग्रवाल ने कहा कि प्रदेश में जिस तरह का वातावरण बनाया गया, उससे उन्हें बहुत कष्ट हुआ है।

उन्होंने कहा, “एक आंदोलनकारी की बात को तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया, जिसका मुझे दुख है और मैं बेहद आहत हूं।”

अग्रवाल ने कहा कि वह राष्ट्रीय स्तर के वॉलीबाल के खिलाड़ी भी रहे हैं।

उन्होंने कहा कि दिवंगत पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने उत्तराखंड बनाया और आज प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी उसे संवार रहे हैं।

पूर्व मंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के कुशल नेतृत्व में उत्तराखंड दिन दूनी रात चौगुनी प्रगति कर रहा है।

अग्रवाल ने भावुक होते हुए कहा कि उन्होंने अपने पद से इस्तीफा देने का निर्णय लिया है लेकिन वह उत्तराखंड के लिए हमेशा काम करते रहेंगे।

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