देश की खबरें | राजस्थान विधानसभा में ‘लाल डायरी’ पर हंगामा, बर्खास्त मंत्री का दावा-इससे गहलोत सरकार होगी बेनकाब

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. राजस्थान के बर्खास्त मंत्री राजेंद्र गुढ़ा व भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधायक मदन दिलावर को सदन में उनके ‘‘अमर्यादित’’ आचरण के लिए सोमवार को विधानसभा सत्र की शेष अवधि के लिए निलंबित कर दिया गया।

जयपुर/नयी दिल्ली, 24 जुलाई राजस्थान के बर्खास्त मंत्री राजेंद्र गुढ़ा व भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधायक मदन दिलावर को सदन में उनके ‘‘अमर्यादित’’ आचरण के लिए सोमवार को विधानसभा सत्र की शेष अवधि के लिए निलंबित कर दिया गया।

सदन में सोमवार को कई बार ‘हंगामेदार व असहज दृश्य’ देखने को मिले जिसकी शुरुआत शून्यकाल के दौरान गुढ़ा द्वारा एक कथित ‘लाल डायरी’ का मुद्दा उठाने से हुई जिसके बारे में उन्होंने दावा किया कि उनके पास अशोक गहलोत नीत सरकार की वित्तीय अनियमितताओं का विवरण है।

कांग्रेस विधायक गुढ़ा के साथ-साथ भाजपा के मदन दिलावर को भी अध्यक्ष सी पी जोशी ने मणिपुर में जातीय हिंसा पर एक प्रस्ताव पारित करने के दौरान हंगामा करने के कारण विधानसभा सत्र की शेष अवधि के लिए निलंबित कर दिया।

सदन की कार्यवाही तीन बार स्थगित की गई और एक बार मार्शल ने गुढ़ा को सदन से बाहर कर दिया। विधानसभा अध्यक्ष जोशी ने गुढ़ा के व्यवहार पर कड़ी आपत्ति जताई और उन्हें बार-बार उनके कक्ष में मिलने के लिए कहा। इस बीच भाजपा विधायकों ने भी नारेबाजी तथा हंगामा शुरू कर दिया और लाल रंग की ‘प्रतीकात्मक’ डायरियां लहराईं।

दिल्‍ली में, भाजपा नेता और केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने राजस्थान में कांग्रेस नीत सरकार पर ‘‘भ्रष्टाचार के सभी रिकॉर्ड तोड़ने’’ का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि अगर गुढ़ा द्वारा उजागर की गई डायरी की सामग्री सामने आ गई तो कई नेताओं का राजनीतिक वजूद खतरे में पड़ जाएगा।

जल शक्ति मंत्री शेखावत ने कहा, ‘‘उस लाल डायरी में ऐसा क्या है जो पूरी सरकार में ‘घबराहट’ है। राजस्थान का हर व्यक्ति इसका रहस्य जानना चाहता है।’’

राज्य में कानून-व्यवस्था को लेकर अपनी ही सरकार की सार्वजनिक रूप से आलोचना करने के बाद गुढ़ा को शुक्रवार को मंत्री पद से बर्खास्त कर दिया गया था।

सदन के बाहर पूर्व मंत्री गुढ़ा ने दावा किया कि यह लाल डायरी उन्हें राजस्थान पर्यटन विकास निगम के अध्यक्ष धर्मेंद्र राठौड़ के घर पर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और आयकर विभाग की छापेमारी के दौरान मिली थी।

उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने छापे के दौरान डायरी सुरक्षित करने के लिए उन्हें राठौड़ के घर जाने के लिए कहा था। गुढ़ा ने दावा किया कि कथित तौर पर राठौड़ द्वारा लिखी गई डायरी में विधायकों को दिए गए पैसे का विवरण है और अशोक गहलोत के साथ-साथ उनके बेटे वैभव गहलोत का भी उल्लेख है।

शून्यकाल के दौरान जब पूर्व मंत्री विधानसभा पहुंचे तो भाजपा विधायक उस डायरी का मुद्दा उठा चुके थे, जिसका जिक्र गुढ़ा ने एक दिन पहले किया था। वह ‘लाल डायरी’ लहराते हुए अध्यक्ष जोशी की कुर्सी की ओर बढ़े। जोशी ने उनके व्यवहार पर आपत्ति जताई और उन्हें अपने कक्ष में मिलने के लिए कहा।

उन्होंने वह डायरी अध्यक्ष को सौंपनी चाही लेकिन जोशी ने उन्हें अनुमति नहीं दी। जोशी ने गुढ़ा से उनके कक्ष में आने को कहा। गुढ़ा व जोशी में काफी देर बहस होती रही। इसके बाद गुढ़ा संसदीय कार्यमंत्री शांति धारीवाल के पास पहुंचे। इस दौरान दोनों के बीच भी कुछ बहस हुई।

इस बीच, कांग्रेस विधायक रफीक खान ने गुढ़ा को एक तरफ किया। सत्ता पक्ष के कई मंत्री वहां पहुंच गए। इस दौरान माहौल काफी हंगामेदार हो गया। विपक्ष के कई विधायकों ने प्रतीकात्मक ‘लाल डायरी’ ले रखी थीं। इसके बाद जोशी ने सदन की कार्यवाही स्थगित करने की घोषणा की।

गुढ़ा ने बाद में दावा किया कि वह धारीवाल के पास केवल यह कहने गए थे कि वह एक बयान देना चाहते हैं। उन्होंने संवाददाताओं से कहा, ‘‘लेकिन कांग्रेस विधायकों ने मुझे धक्का देकर जमीन पर गिरा दिया और मुझे पकड़ लिया। धारीवाल समेत उनमें से कुछ ने मुझे लात मारी और मुझसे डायरी छीन ली। हालांकि, डायरी का कुछ हिस्सा अभी भी मेरे पास है।’’

गुढ़ा ने कहा कि वह मंगलवार को लोगों के बीच जाएंगे और डायरी का ‘राज’ उजागर करेंगे। जब डायरी की सामग्री के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने दावा किया, ‘‘डायरी धर्मेंद्र राठौड़ द्वारा लिखी गई है। इसमें अशोक गहलोत और उनके बेटे का नाम है। इसमें वित्तीय लेनदेन का-विधायकों को दिए गए पैसे का विवरण है। लाखों में नहीं, बल्कि 2-5 करोड़ रुपये की रकम थी।’’

उन्होंने कहा कि विधायकों का नार्को टेस्ट कराया जाना चाहिए। गुढ़ा ने कहा, ‘‘मैं नार्को टेस्ट के लिए भी तैयार हूं। जो बलात्कारी जेल में हैं और जो सदन में बैठे हैं, उनमें कोई अंतर नहीं है।’’

गुढ़ा और दिलावर को ‘अभद्र आचरण’ के कारण विधानसभा के सत्र की शेष अवधि के लिए निलंबित कर दिया गया। धारीवाल ने इस संबंध में प्रस्ताव रखा जिसे सदन ने पारित कर दिया।

धारीवाल ने कहा कि गुढ़ा ने उनके साथ हाथापाई की कोशिश की और अगर मार्शल उनके बचाव में नहीं आते तो एक ‘बड़ी घटना’ हो सकती थी। उन्होंने गुढ़ा के व्यवहार को बेहद शर्मनाक और असंसदीय बताया। दिलावर के बारे में धारीवाल ने कहा, वह उनकी ओर बढ़े थे और उन पर हमला करने वाले थे।

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