देश की खबरें | उपहार सिनेमा अग्निकांड: उच्च न्यायालय ने अंसल बंधुओं को पुलिस की याचिका पर जवाब देने कहा

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. दिल्ली उच्च न्यायालय ने 1997 के उपहार सिनेमा अग्निकांड के साक्ष्यों से कथित तौर पर छेड़छाड़ किये जाने के लेकर ‘रियल एस्टेट’ कारोबारी सुशील और गोपाल अंसल की सजा की अवधि बढ़ाने संबंधी दिल्ली पुलिस के अनुरोध पर दोनों व्यक्तियों से बुधवार को जवाब मांगा।

नयी दिल्ली, 25 जनवरी दिल्ली उच्च न्यायालय ने 1997 के उपहार सिनेमा अग्निकांड के साक्ष्यों से कथित तौर पर छेड़छाड़ किये जाने के लेकर ‘रियल एस्टेट’ कारोबारी सुशील और गोपाल अंसल की सजा की अवधि बढ़ाने संबंधी दिल्ली पुलिस के अनुरोध पर दोनों व्यक्तियों से बुधवार को जवाब मांगा।

इस अग्निकांड में 59 लोगों की जान चली गई थी।

पुलिस ने अंसल बंधुओं को रिहा करने संबंधी निचली अदालत के 19 जुलाई के आदेश को चुनौती दी है। उनकी करीब आठ महीने की सजा अंसल बंधुओं द्वारा जेल में काटे गये समय के मद्देनजर घटा दी गई थी।

न्यायमूर्ति ए जे भंभानी ने अंसल बंधुओं, अदालत के पूर्व कर्मचारी दिनेश चंद शर्मा और अंसल के पूर्व कर्मचारी पी पी बत्रा को नोटिस जारी किया तथा उनसे पुलिस की याचिका पर जवाब दाखिल करने को कहा।

अदालत ने एसोसिएशन ऑफ विक्टिम्स ऑफ उपहार ट्रैजडी (एवीयूटी) को भी जवाब दाखिल करने कहा और विषय की अगली सुनवाई 13 अप्रैल के लिए निर्धारित कर दी, जब अन्य संबद्ध याचिकाओं की सुनवाई सूचीबद्ध की गई है।

उल्लेखनीय है कि एक मजिस्ट्रेट अदालत ने आठ नवंबर 2021 को अंसल बंधुओं को सात साल की कैद की सजा सुनाई थी और तब से वे जेल में थे।

जिला न्यायाधीश ने 19 जुलाई 2022 को सजा पर मजिस्ट्रेट अदालत के आदेश में बदलाव किया और दोषियों के आठ नवंबर 2021 से जेल में काटे गये समय के मद्देनजर अंसल बंधुओं, शर्मा और अंसल के तत्कालीन कर्मचारी पी पी बत्रा की रिहाई का निर्देश दिया था।

हालांकि, जिला न्यायाधीश ने मजिस्ट्रेट अदालत द्वारा सुशील और गोपाल अंसल पर लगाये गये सवा दो-दो करोड़ रुपये तथा अन्य दो पर तीन-तीन लाख रुपये के जुर्माने को बरकरार रखा था।

अंसल बंधुओं की दोषसिद्धि बरकरार रखते हुए निचली अदालत ने सह आरोपी अनूप सिंह को बरी कर दिया था।

यह मामला अग्निकांड के मुख्य मामले में साक्ष्य से कथित छेड़छाड़ करने से संबद्ध है। मुख्य मामले में अंसल बंधुओं को उच्चतम न्यायालय ने दोषी करार देते हुए दो साल की कैद की सजा सुनाई थी।

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