देश की खबरें | उप्र:छात्र की पहचान का खुलासा करने के आरोप में आल्ट न्यूज के मोहम्मद जुबैर के खिलाफ प्राथमिकी
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. मुजफ्फरनगर जिले के एक निजी स्कूल में एक शिक्षिका के निर्देश पर एक छात्र को उसके सहपाठियों से थप्पड़ लगवाए जाने की घटना के पीड़ित की पहचान का खुलासा करने के आरोप में ‘आल्ट न्यूज’ के सह-संस्थापक मोहम्मद जुबैर के खिलाफ एक प्राथमिकी दर्ज की गई है। पुलिस के एक अधिकारी ने सोमवार को यह जानकारी दी।
मुजफ्फरनगर (उप्र), 28 अगस्त मुजफ्फरनगर जिले के एक निजी स्कूल में एक शिक्षिका के निर्देश पर एक छात्र को उसके सहपाठियों से थप्पड़ लगवाए जाने की घटना के पीड़ित की पहचान का खुलासा करने के आरोप में ‘आल्ट न्यूज’ के सह-संस्थापक मोहम्मद जुबैर के खिलाफ एक प्राथमिकी दर्ज की गई है। पुलिस के एक अधिकारी ने सोमवार को यह जानकारी दी।
मंसूरपुर थाना क्षेत्र के खुब्बापुर गांव स्थित स्कूल की शिक्षिका तृप्ता त्यागी के निर्देश पर कक्षा-2 के एक छात्र के सहपाठियों ने उसे शुक्रवार को थप्पड़ मारा था।
जिले के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) संजीव सुमन ने बताया कि किशोर न्याय (बच्चों की देखरेख और संरक्षण) अधिनियम, 2015 की धारा 74 के तहत मोहम्मद जुबैर के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है।
गांव के निवासी एवं शिकायतकर्ता विष्णु दत्त ने आरोप लगाया है कि जुबैर ने घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर साझा कर बच्चे की पहचान का खुलासा किया।
शुक्रवार को शिक्षिका का एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें कक्षा-2 के एक मुस्लिम छात्र के कथित तौर पर गृह कार्य (होमवर्क) पूरा नहीं करने को लेकर उसके सहपाठियों द्वारा उसे थप्पड़ मारे जाते देखा जा सकता है।
मामले के तूल पकड़ने के बाद शनिवार को पीड़ित छात्र के परिवार की शिकायत के आधार पर त्यागी के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 323 (स्वेच्छा से चोट पहुंचाने के लिए सजा) और 504 (शांति भंग करने के इरादे से जानबूझकर अपमान करना) के तहत मामला दर्ज किया गया।
त्यागी ने अपने बचाव में कहा कि मामले को सांप्रदायिक रंग देने के लिए वीडियो के साथ छेड़छाड़ की गई है। उसने दावा किया कि वीडियो छात्र के चाचा ने शूट किया था।
शिक्षिका ने कहा कि छात्र को उसके सहपाठियों से थप्पड़ लगवाना गलत था, लेकिन उसे ऐसा करने के लिए मजबूर होना पड़ा क्योंकि वह दिव्यांग हैं और वह अपना गृह कार्य नहीं करने वाले छात्र तक पहुंचने में सक्षम नहीं थीं।
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