गुवाहाटी, 31 जुलाई बिजली की अनिश्चित आपूर्ति असम की बराक घाटी में चाय उद्योग के लिए एक ‘गंभीर चुनौती’ बन गयी है, जिसके कारण इस साल मार्च से जून की अवधि में लगभग 55 लाख किग्रा फसल के बर्बाद होने की सूचना है। भारतीय चाय संघ (टीएआई) ने यह जानकारी दी है।
टीएआई के महासचिव पी के भट्टाचार्यजी ने बृहस्पतिवार को एक बयान में कहा कि ‘लॉकडाऊन’ लंबा खिंचने के कारण बराक घाटी में इस साल मार्च से जून की अवधि में करीब 55 लाख टन फसल नुकसान के अनुमान को देखते हुए, चालू सत्र के दौरान चाय उद्योग को फसल का परिदृश्य धुंधला दिखाई देता है।
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उन्होंने कहा कि महामारी के कारण प्रीमियम चायपत्तियों की पहली तुड़ाई की अवधि के दौरान चाय बागानों के बंद होने से भारी नुकसान हुआ। अब बिजली की अनिश्चित आपूर्ति के कारण अतिरिक्त वित्तीय बोझ बढ़ गया है, जो चाय उद्योग के अस्तित्व के लिए खतरा बन गया है क्योंकि उत्पादन लागत काफी बढ़ रही है।
भट्टाचार्य ने कहा, ‘‘चाय उद्योग संकेटों से जूझ रहा है तथा अपने वैधानिक दायित्वों को पूरा करने के मामले में कठिन समय गुजर रहा है। अब अनिश्चित बिजली आपूर्ति ने बराक घाटी में चाय उद्योग के लिए स्थिति बदतर बना दी है।’’
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चाय बागानों ने प्रभावी उपचारात्मक उपायों को शुरू करने के लिए बराक घाटी क्षेत्र के असम विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड (एपीडीसीएल) के अधिकारियों को जानकारी दे दी है।
भट्टाचार्यजी ने कहा कि एसोसिएशन ने राज्य सरकार से हस्तक्षेप करने और बराक घाटी में चाय बागानों को ग्रिड से बिजली आपूर्ति की उपलब्धता सुनिश्चित करने का आग्रह किया है।
राजेश
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