विदेश की खबरें | जलवायु परिवर्तन पर लगाम से जुड़े उपायों पर रिपोर्ट जारी करेगा यूएन दल
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on world at LatestLY हिन्दी. जलवायु परिवर्तन पर अंतरसरकारी पैनल की रिपोर्ट को वैश्विक तापमान में वृद्धि के स्तर, उसके प्रभाव और उससे निपटने के लिए किए जा रहे प्रयासों का सबसे आधिकारिक आकलन माना जाता है।
जलवायु परिवर्तन पर अंतरसरकारी पैनल की रिपोर्ट को वैश्विक तापमान में वृद्धि के स्तर, उसके प्रभाव और उससे निपटने के लिए किए जा रहे प्रयासों का सबसे आधिकारिक आकलन माना जाता है।
नीति निर्माताओं के लिए दिशा-निर्देशों को अंतिम रूप देने की खातिर सरकारों और वैज्ञानिकों के बीच होने वाली बातचीत मूल समयसीमा से खिंचकर रविवार देर रात तक चली, जिससे रिपोर्ट का प्रस्तावित प्रकाशन कई घंटे आगे बढ़ गया।
वर्ष 2015 के पेरिस जलवायु समझौते में सरकारें इस सदी में वैश्विक तापमान में वृद्धि को 1.5 डिग्री सेल्सियस पर सीमित रखने पर सहमत हुई थीं। हालांकि, कई विशेषज्ञों का कहना है कि तापमान वृद्धि के पूर्व-औद्योगिक काल के स्तर से 1.1 डिग्री सेल्सियस अधिक हो जाने के मद्देनजर लक्ष्य प्राप्ति के लिए ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन में भारी कटौती ही एकमात्र उपाय है।
रिपोर्ट में वैश्विक तापमान में वृद्धि का आंकड़ा सर्दियों में लिया गया था यानी रूस-यूक्रेन युद्ध के असर को इसमें शामिल नहीं किया गया है।
‘बर्लिन इकोनॉमिक्स’ नामक ‘कंसल्टेंसी’ के विश्लेषक रूवेन स्टब ने कहा कि रूस-यूक्रेन युद्ध से पैदा भू-राजनीतिक और आर्थिक संकट के चलते कार्बन उत्सर्जन में कटौती के प्रयास बाधित होने का खतरा है। स्टब इस रिपोर्ट को तैयार करने की प्रक्रिया में शामिल नहीं थे।
उन्होंने कहा, “ईंधन की ऊंची कीमतों को देखते हुए उत्सर्जन से जुड़े नियमों में ढील देने की मांग जोर पकड़ रही है, जिसका मकसद कंपनियों को ज्यादा प्रदूषण के लिए जिम्मेदार ऊर्जा स्रोतों से दूरी बनाने के वास्ते प्रेरित करना है।”
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