विदेश की खबरें | चीन की अपील के बावजूद संयुक्त राष्ट्र ने मध्य अफ्रीकी गणराज्य पर हथियार प्रतिबंध बढ़ाए

परिषद ने उस प्रस्ताव को भी 14 - 0 मतों के साथ स्वीकृति दी है जो व्यक्तियों और कंपनियों पर लक्षित प्रतिबंधों को बढ़ाता है जबकि चीन ने अपना मत नहीं डाला।

अमेरिका उपराजदूत रिचर्ड मिल्स ने हथियार प्रतिबंधों, यात्रा प्रतिबंधों और संपत्तियों की लेन-देन पर रोक का स्वागत किया है और इन उपायों को मध्य अफ्रीकी गणराज्य में “शांति एवं सुरक्षा को बढ़ावा देने के लिए अहम’’ बताया है। उन्होंने कहा कि देश में ‘‘संकट का कोई सैन्य समाधान नहीं है”।

खनिज संपन्न मध्य अफ्रीकी गणराज्य 2013 के बाद से घातक अंतर-धार्मिक और अंतर-सांप्रदायिक लड़ाई का सामना कर रहा है, जब मुख्य रूप से मुस्लिम सेलाका विद्रोहियों ने तत्कालीन राष्ट्रपति फ्रेंकोइस बोज़ीज़ को हटा दिया था, जिससे ज्यादातर ईसाई मिलिशिया में प्रतिशोध की भावना जगी थी।

फरवरी 2019 में सरकार और 14 विद्रोही समूहों के बीच एक शांति समझौते पर हस्ताक्षर किए गए थे। लेकिन संवैधानिक अदालत द्वारा दिसंबर में राष्ट्रपति पद के लिए बोज़ीज़ की उम्मीदवारी को खारिज करने के बाद, उनसे जुड़े विद्रोहियों ने चुनावों को रोकने की कोशिश की और फिर राष्ट्रपति फॉस्टिन अर्चेंज तौदेरा से सत्ता छीनने का प्रयास किया जिन्होंने दूसरी बार जीत दर्ज की थी।

प्रस्ताव को प्रायोजित करने वाले संयुक्त राष्ट्र में फ्रांस के राजदूत निकोलस डी रिवेरे ने मतदान के बाद संवाददाताओं से कहा, "यह मध्य अफ्रीकी गणराज्य में बिगड़ते हालात में विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, जहां बहुत ही चिंताजनक रूप से हिंसा बढ़ रही है और मानवाधिकारों एवं अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का उल्लंघन हो रहा है।"

उन्होंने कहा, “हथियारों का प्रसार स्पष्ट रूप से समस्या का हिस्सा है और उनका नियंत्रण देश की सुरक्षा के लिए बड़ा मुद्दा है।”

लेकिन संयुक्त राष्ट्र में चीन के उपराजदूत दाई बिंग ने इस पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि दिसंबर के सफल चुनावों के बाद से “देश में सुरक्षा स्थिति सुधर रही है।”

(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)