देश की खबरें | ‘उदयपुर फाइल्स’ के निर्माताओं ने दिल्ली उच्च न्यायालय से कहा, फिल्म का पुनः प्रमाणन लंबित

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नयी दिल्ली, 28 जुलाई दिल्ली उच्च न्यायालय को सोमवार को सूचित किया गया कि ‘उदयपुर फाइल्स-कन्हैया लाल टेलर मर्डर’ के निर्माताओं ने फिल्म के पुनः प्रमाणन के लिए केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सीबीएफसी) के समक्ष आवेदन किया है, जिस पर जल्द ही विचार किए जाने की संभावना है।

निर्माताओं ने बताया कि पुन: प्रमाणन के तहत केंद्र की सिफारिश पर छह दृश्यों में की गई काट-छांट के साथ ही एक अस्वीकरण भी दिया गया है।

यह देखते हुए कि फिल्म का पुनः प्रमाणन लंबित है और एक याचिकाकर्ता की ओर से स्थगन का अनुरोध किया गया है, मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तुषार राव गेडेला की पीठ ने याचिकाओं को 30 जुलाई को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया।

फिल्म की रिलीज को मंजूरी देने के केंद्र के फैसले के खिलाफ याचिकाकर्ताओं को उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाने के उच्चतम न्यायालय के निर्देश के बाद दो याचिकाएं उच्च न्यायालय के समक्ष सूचीबद्ध की गईं।

ये याचिकाएं जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी और कन्हैया लाल हत्याकांड के आरोपी मोहम्मद जावेद द्वारा दायर की गई हैं।

फिल्म विवाद से संबंधित दो याचिकाएं सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश के बाद उच्च न्यायालय के समक्ष आईं।

उच्चतम न्यायालय ने 25 जुलाई को कहा था कि फिल्म रिलीज पर रोक लगाने वाले उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती देने वाली फिल्म निर्माताओं की अपील निरर्थक है, क्योंकि उन्होंने केंद्र के 21 जुलाई के आदेश को स्वीकार कर लिया है, जिसमें छह दृश्यों को हटाने का सुझाव देने समेत ‘डिस्क्लेमर’ (अस्वीकरण) में संशोधन के साथ रिलीज को मंजूरी दी गई थी।

उदयपुर के दर्जी कन्हैया लाल की जून 2022 में मोहम्मद रियाज और मोहम्मद गौस ने कथित तौर पर हत्या कर दी थी।

हमलावरों ने बाद में एक वीडियो जारी किया था, जिसमें दावा किया गया था कि भारतीय जनता पार्टी की (भाजपा) पूर्व नेता नूपुर शर्मा की पैगंबर मोहम्मद पर की गई कथित विवादास्पद टिप्पणी के बाद दर्जी कन्हैया लाल शर्मा ने सोशल मीडिया पर उनके समर्थन में कथित तौर पर पोस्ट साझा किया था, जिसके लिए उसकी हत्या कर दी गई।

इस मामले की जांच राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) ने की थी और आरोपियों पर भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) के अलावा गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम (यूएपीए) के प्रासंगिक प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया गया था।

यह मुकदमा जयपुर की विशेष एनआईए अदालत में लंबित है।

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