देश की खबरें | यूसीसी से धार्मिक विविधता व संवैधानिक सिद्धांतों को नुकसान पहुंचने की आशंका: महमूद मदनी
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नयी दिल्ली, 25 जनवरी प्रमुख मुस्लिम संगठन जमीयत उलेमा-ए-हिंद (एमएम समूह) के प्रमुख ने प्रस्तावित समान नागरिक संहिता (यूसीसी) पर विपक्षी दलों के कुछ सांसदों से चर्चा करते हुए दावा किया कि इससे धार्मिक विविधता और अल्पसंख्यकों के संवैधानिक अधिकारों को नुकसान पहुंचने की आशंका है।
जमीयत की ओर से मंगलवार को जारी एक बयान के मुताबिक, संगठन ने यूसीसी के जरिये ‘मुस्लिम अल्पसंख्यक और आदिवासी समुदाय के सांस्कृतिक और धार्मिक अधिकारों को समाप्त किए जाने के प्रयासों’ को लेकर विपक्षी दलों के कुछ सांसदों के साथ सोमवार शाम यहां चर्चा आयोजित की थी।
बयान में कहा गया है कि इस चर्चा में कांग्रेस सांसद कार्ति चिदम्बरम, डॉ. मोहम्मद जावेद और इमरान प्रतापगढ़ी, नेशनल कॉन्फ्रेंस के सांसद हसनैन मसूदी, एलजेपी के महबूब अली कैसर, बहुजन समाज पार्टी के कुंवर दानिश अली तथा इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग के सांसद ईटी मोहम्मद बशीर तथा अब्दुस्समद समदानी ने हिस्सा लिया।
जमीयत के मुताबिक, मदनी ने दावा किया, “यूसीसी से धार्मिक विविधता, अल्पसंख्यकों के अधिकार और समानता एवं न्याय के संवैधानिक सिद्धांतों को नुकसान पहुंचने की आशंका है।”
बयान के अनुसार, मदनी ने कहा कि भारत की ताकत इसकी समृद्ध सांस्कृतिक और धार्मिक विविधता में निहित है और अगर समान नागरिक संहिता को लागू किया गया तो संभवतः इस विविधता को नुकसान पहुंचेगा।
मौलाना मदनी ने मुस्लिम समुदाय के अधिकारों और हितों की रक्षा करने की आवश्यकता पर भी बल दिया।
जमीयत ने कहा कि चर्चा के दौरान उच्चतम न्यायालय के वकील एमआर शमशाद ने ‘पावर प्वाइंट’ के जरिये दी गई प्रस्तुति से समान नागरिक संहिता के संभावित नुकसान पर प्रकाश डाला। बयान में शमशाद के हवाले से कहा गया है कि यूसीसी मुस्लिम महिलाओं के लिए भी हानिकारक है।
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