देश की खबरें | त्रिपुरा के शाही वंशज का दावा : राष्ट्रीय दलों ने आदिवासी संगठनों पर गठबंधन के लिए डाला दबाव
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. त्रिपुरा में एक नए क्षेत्रीय राजनीतिक दल टिपरा मोथा ने दिल्ली और कोलकाता के राष्ट्रीय दलों पर पूर्वोत्तर राज्य के कई स्थानीय संगठनों पर दबाव डालने का आरोप लगाया है।
अगरतला, 15 अक्टूबर त्रिपुरा में एक नए क्षेत्रीय राजनीतिक दल टिपरा मोथा ने दिल्ली और कोलकाता के राष्ट्रीय दलों पर पूर्वोत्तर राज्य के कई स्थानीय संगठनों पर दबाव डालने का आरोप लगाया है।
टिपरा मोथा का आरोप है कि राष्ट्रीय दल विधानसभा चुनाव से पहले कई क्षेत्रीय पार्टियों को अपने साथ गठबंधन करने के लिए मजबूर कर रहे हैं।
त्रिपुरा के शाही परिवार के वंशज, टिपरा मोथा के प्रमुख प्रद्योत माणिक्य देबबर्मा ने हालांकि कहा कि उनकी पार्टी बड़े राजनीतिक संगठनों से ‘‘एक पैसा नहीं’’ लेगी, और 2023 के विधानसभा चुनाव खुद लड़ेगी।
टिपरा मोथा के महिला प्रकोष्ठ के एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए देबबर्मा ने कहा, “मैं भारतीय जनता पार्टी (भाजपा), कांग्रेस या मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) जैसे राजनीतिक दलों से एक भी पैसा नहीं लूंगा। लेकिन, अगर मुझे पैसे की जरूरत पड़ी तो मैं अपने दम पर चुनाव लड़ने के लिए राजमाता के राजमहल और गहने बेच दूंगा।”
देबबर्मा ने भाजपा और कांग्रेस की ओर इशारा करते हुए कहा कि दिल्ली और कोलकाता के दबाव ने त्रिपुरा उपजाति जुबा समिति (टीयूजेएस) और इंडीजिनस पीपुल्स फ्रंट ऑफ त्रिपुरा (आईपीएफटी) जैसे क्षेत्रीय दलों को गठबंधन करने के लिए मजबूर किया।
आईपीएफटी अब भाजपा के साथ गठबंधन में है, जबकि टीयूजेएस ने पहले कांग्रेस के साथ गठबंधन किया था। उन्होंने कहा कि पार्टी टिपरासा आदिवासियों के मुद्दे पर चुनाव लड़ेगी, जिसमें राज्य की 19 स्वदेशी जनजातियां शामिल हैं। दिल्ली से दबाव आने पर भी इस बार टिपरासा अपनी ताकत दिखाएंगे। यह 2023 के विधानसभा चुनाव में आदिवासियों पर हुए अत्याचारों का जवाब देने के लिए दृढ़ संकल्पित है।
त्रिपुरा के शाही परिवार के वंशज देबबर्मा ने कहा, “बीते 70 वर्षों में हमें विधायक, मंत्री और सांसद मिले हैं, लेकिन हमारा अधिकार नहीं मिला। अब मुझे टिपरासा आंदोलन का नेतृत्व करना होगा। चाहे मैं जीतूं या हारूं।”
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