ताजा खबरें | त्रिपुरा जनजातीय विधेयक चर्चा दो लोस

Get latest articles and stories on Latest News at LatestLY. द्रमुक के ए राजा ने चर्चा में भाग लेते हुए कहा कि आजादी के सात दशक के बाद भी सरकारों की तरफ से अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों को निर्धारित करने की प्रक्रिया चलना क्या ‘शर्म की बात’ नहीं है।

द्रमुक के ए राजा ने चर्चा में भाग लेते हुए कहा कि आजादी के सात दशक के बाद भी सरकारों की तरफ से अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों को निर्धारित करने की प्रक्रिया चलना क्या ‘शर्म की बात’ नहीं है।

उन्होंने कहा कि उक्त विधेयक समग्र नहीं है और अन्य कई राज्यों से भी इस तरह की मांग हैं। उन्होंने तमिलनाडु के दो समुदायों को अनुसूचित जनजातियों में शामिल करने की वर्षों पुरानी मांग पर भी केंद्र से निर्णय लेने का अनुरोध किया।

राजा ने भी कहा कि विधेयक लाने की यह पहली अच्छी हो सकती है लेकिन ‘राजनीति से प्रेरित’ लगती है।

वाईएसआरसीपी की जी माधवी ने कहा कि सरकार की अनेक योजनाओं के बाद भी अनुसूचित जनजातियों के लोग गरीबी में रह रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार को आदिवासियों को देश के विकास की मुख्यधारा में लाना चाहिए।

उन्होंने इस विधेयक को ‘प्रगतिशील’ बताते हुए कहा कि यह आदिवासियों के अधिकार सुनिश्चित करने की दिशा में सही कदम है। माधवी ने केंद्र सरकार से अनुरोध किया कि अनुसूचित क्षेत्रों में जनजातीय बच्चों के लिए अलग शैक्षिक जोन स्थापित किये जाने चाहिए।

तृणमूल कांग्रेस की प्रतिमा मंडल ने कहा कि सरकार को जनजातीय समुदायों के विकास के लिए प्रगतिशील बदलाव करने होंगे। उन्होंने कहा कि सरकार को जनजातियों के विकास के लिए अधिक धन आवंटित करना चाहिए और सभी सुदूर इलाकों में अस्पताल खोलने चाहिए।

चर्चा में हिस्सा लेते हुए शिवसेना के अरविंद सावंत ने कहा कि महाराष्ट्र में धनगड़ समुदाय काफी समय से अपनी मांग रख रहा है ।

उन्होंने कहा कि एक बार केंद्र सरकार सभी राज्यों को पत्र लिखकर पूछे कि कितनी जातियां हैं जिन्हें लाभ नहीं मिल रहा है। इसके बाद इस विषय पर एक समग्र विधेयक लाया जाए।

राकांपा के मोहम्मद फैजल ने भी राष्ट्रीय परिदृश्य को ध्यान में रखते हुए एक समग्र विधेयक लाने की मांग की ।

कांग्रेस के सप्तगिरि उल्का ने कहा कि सरकार इस बात पर ध्यान दे कि जनजातीय लोग कैसे उद्यमी बनें और उन्हें आसानी से बैंक से रिण कैसे मिले ।

भाजपा के रेवती त्रिपुरा ने कहा कि अगर शुरू में ही इस विषय को गंभीरता से लिया जाता तब सरकार को आज यह विधेयक नहीं लाना पड़ता ।

नेशनल पीपुल्स पार्टी की अगाथा संगमा ने जनजातीय मामलों के मंत्रालय के कम बजट और आवंटित धन पूरी तरह से खर्च नहीं होने का विषय उठाया।

उन्होंने संसद की एक समिति की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग पिछले चार साल से निष्क्रिय है और उसने एक भी रिपोर्ट नहीं दी है । इस विषय पर ध्यान दिया जाना चाहिए ।

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