जरुरी जानकारी | आज के आर्थिक हालात वायपेयी के शासनकाल के समान : आर्थिक समीक्षा
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on Information at LatestLY हिन्दी. वित्त वर्ष 2022-23 की आर्थिक समीक्षा में पिछले आठ वर्षो में देश के आर्थिक हालात को 1998-2002 के अटल बिहारी वाजपेयी सरकार के शासनकाल में उत्पन्न स्थितियों के समान बताया है। इसमें उम्मीद जतायी गयी है कि महामारी के वैश्विक झटकों से उबरने, जिंस कीमतों में कम बढ़ोतरी से भारतीय अर्थव्यवस्था आने वाले दशक में अपनी क्षमता से बढने के लिये पूर्ण रूप से तैयार है।
नयी दिल्ली, 31 जनवरी वित्त वर्ष 2022-23 की आर्थिक समीक्षा में पिछले आठ वर्षो में देश के आर्थिक हालात को 1998-2002 के अटल बिहारी वाजपेयी सरकार के शासनकाल में उत्पन्न स्थितियों के समान बताया है। इसमें उम्मीद जतायी गयी है कि महामारी के वैश्विक झटकों से उबरने, जिंस कीमतों में कम बढ़ोतरी से भारतीय अर्थव्यवस्था आने वाले दशक में अपनी क्षमता से बढने के लिये पूर्ण रूप से तैयार है।
संसद में पेश वित्त वर्ष 2022-23 की आर्थिक समीक्षा में कहा गया है कि वर्ष 2014-2022 के आर्थिक हालात 1998-2002 की स्थिति के ही समान है।
इसमें कहा गया है कि घरेलू और वैश्विक आधातों की एक श्रृंखला 1998 से 2002 के बीच देखी गई थी जिसने निवेशकों के विश्वास को कमजोर कर दिया। भारत के परमाणु परीक्षण के बाद अमेरिका द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों के कारण बाद के महीने में भारत में पूंजी प्रवाह में तेजी से गिरावट आई।
वहीं, वर्ष 2000 और 2002 के बीच की अवधि में देश में लगातार दो बार सूखा भी पड़ा। इन घरेलू आघातों से वृद्धि प्रभावित हुई और 9:11 आतंकी हमलों के परिणामस्वरूप बड़ी वैश्विक अनिश्चितता भी सामने थी।
आर्थिक समीक्षा में कहा गया है कि 1998 से 2002 के दौरान 1998 के परमाणु परीक्षण एवं इसके कारण प्रतिबंध, बैंकिग और कॉरपोरेट क्षेत्र के बही-खातों को कम तरजीह देना, लगातार दो सूखे, आर्थिक मंदी और 9/11 आतंकी हमले से अर्थव्यवस्था को झटका लगा।
इसमें कहा गया है कि वर्ष 2014 से 2022 के दौरान बैंकिग, गैर-बैकिंग और गैर वित्तीय कारपोरेट क्षेत्र के बही-खाते पर दबाव, महामारी के अभूतपूर्व झटके के बाद मुद्रास्फीति, वैश्विक स्तर पर जिंस कीमतों का दबाव से वस्तु वित्तीय स्थिति पर प्रभाव पड़ा।
रिपोर्ट में कहा गया है कि 1998 से 2002 के दौरान ब्याज दर विनियमन, निजीकरण, बैंकों के लिये सम्पत्ति वसूली, आधारभूत ढांचा क्षेत्र में स्वर्णिम चतुर्भुज, राजकोषीय दायित्व एवं बजट प्रबंधन अधिनियम लाने जैसे अर्थव्यवस्था में संरचनात्मक सुधार कदम उठाए गए। ऐसे संरचनात्मक सुधारों से दबाव समाप्त करने में मदद मिली और इसके बाद 2003 से विकास के ‘लाभांश’ मिलने शुरू हुए।
इसी प्रकार से, वर्तमान संदर्भ में महामारी के वैश्विक झटकों से उबरने और 2022 में माल एवं जिंस की कीमतों में कम बढ़ोतरी होने, कर को युक्तिसंगत बनाने, कर प्रशासन में सुधार, व्यय प्रबंधन सुधार, आत्मनिर्भरता जैसे कदमों से भारतीय अर्थव्यवस्था आने वाले दशक में अपनी क्षमता से बढने के लिये पूर्ण रूप से तैयार है।
दीपक
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