जरुरी जानकारी | अवसंरचना परियोजनाओं में गुणवत्ता, लागत कटौती के लिए नयी प्रौद्योगिकी अपनाने का समय: गडकरी

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नयी दिल्ली, 10 सितंबर सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने बुधवार को कहा कि अवसरंचना परियोजनाओं की लागत कम रखने और बेहतर गुणवत्ता के लिए उद्योग जगत को नये तौर -तरीके और नवीन प्रौद्योगिकियों को अपनाना चाहिये।

गडकरी ने सीमेंट कंपनियों को कालाबाजारी, मुनाफाखोरी और सांठ-गांठ वाला व्यापार करने के खिलाफ चेतावनी भी दी। वह उद्योग मंडल फिक्की के ‘बिटु-कॉन 2020, बिटुमन एंड रोड कंस्ट्रक्शन इंडस्ट्री’ के एक कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।

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उन्होंने कहा, ‘‘आपको निर्माण लागत कम करने और गुणवत्ता बेहतर करने की जरूरत है। लागत में कमी निर्माण की गुणवत्ता से किसी तरह का समझौता किए बगैर होनी चाहिए।’’

गडकरी के पास सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग (एमएसएमई) मंत्रालय का भी प्रभार है। उन्होंने कहा कि उद्योग नवोन्मेष और प्रौद्योगिकी के माध्यम से देश के बुनियादी ढांचे को बेहतर करने में अहम भूमिका अदा कर सकते हैं।

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उद्योगों को निर्माण में अपशिष्टों के नवोन्मेषी उपयोग के तरीके अपनाने पर विचार करना चाहिए। उदाहरण के लिए वह अवसंरचना परियोजनाओं में अन्य सामग्री के स्थान पर धातु की तलछट का उपयोग कर सकते हैं।

गडकरी ने कहा कि पुल बनाने की लागत को नवोन्मेषी प्रौद्योगिकियों को आगे बढ़ाकर कम किया जा सकता है। जैसे कि मलेशिया में इस्पात के फाइबर का उपयोग किया जाता है। यह सफल प्रौद्योगिकी है और पुलों के निर्माण में सालाना 25,000 करोड़ रुपये की बचत कर सकता है।

इसी तरह नीति आयोग ने परियोजनाओं के लिए बुलढाना के तरीके को मान्यता दी है। इसने महाराष्ट्र में कुछ जगहों की सूरत बदल दी है। इस मॉडल में तालाबों की खुदाई की जाती है जो सूखा प्रभावित क्षेत्रों में वर्षा जल संचयन और भूजल स्तर को फिर से सही करने में मदद करते हैं।

राजमार्ग मंत्रालय ऐसे क्षेत्रों में यह खुदाई मुफ्त में करता है और इससे मिलने वाली मिट्टी और रेत का उपयोग राजमार्ग निर्माण में किया जाता है जबकि स्थानीय आबादी को वर्षा जल संचयन के लिये तालाब आदि मिल जाते हैं।

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