विदेश की खबरें | सैन्य प्रतिष्ठानों पर हमला करने वालों पर कानून के तहत मुकदमा शुरू किया गया: पाक सेना प्रमुख
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on world at LatestLY हिन्दी. मानवाधिकार समूहों की चिंताओं को खारिज करते हुए पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर ने कहा कि अधिकारियों ने कड़े सैन्य कानूनों के तहत उन लोगों के खिलाफ ‘‘कानूनी प्रक्रिया के अनुसार मुकदमा’’ शुरू किया है, जो पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की गिरफ्तारी के बाद सैन्य प्रतिष्ठानों पर हुए हमलों में शामिल थे।
इस्लामाबाद, 21 मई मानवाधिकार समूहों की चिंताओं को खारिज करते हुए पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर ने कहा कि अधिकारियों ने कड़े सैन्य कानूनों के तहत उन लोगों के खिलाफ ‘‘कानूनी प्रक्रिया के अनुसार मुकदमा’’ शुरू किया है, जो पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की गिरफ्तारी के बाद सैन्य प्रतिष्ठानों पर हुए हमलों में शामिल थे।
जनरल मुनीर ने शनिवार को पंजाब प्रांत की राजधानी लाहौर के अपने दौरे के दौरान यह बात कही। लाहौर हिंसक प्रदर्शनों से सबसे अधिक प्रभावित हुआ शहर है।
सेना की ओर से देर रात जारी एक बयान के अनुसार, जनरल मुनीर ने कोर मुख्यालय में अधिकारियों और सैनिकों को संबोधित किया।
उन्होंने कहा, ‘‘ नौ मई की हिंसा में शामिल लोगों, हिंसा भड़काने वालों, उकसाने वालों तथा अपराधियों के खिलाफ पाकिस्तान सेना अधिनियम और आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम के तहत पाकिस्तान के संविधान में मौजूदा तथा स्थापित कानूनी प्रक्रियाओं के अनुसार मुकदमा शुरू किया गया है।’’
गौरतलब है कि नौ मई को इस्लामाबाद उच्च न्यायालय के परिसर से अर्धसैनिक रेंजरों द्वारा इमरान खान को गिरफ्तार किए जाने के बाद हिंसक विरोध-प्रदर्शन शुरू हुए थे। उनकी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने जिन्ना हाउस (लाहौर कोर कमांडर हाउस), मियांवाली वायुसेना अड्डे और फैसलाबाद में आईएसआई भवन सहित एक दर्जन सैन्य प्रतिष्ठानों में तोड़फोड़ की थी। पहली बार रावलपिंडी में सेना मुख्यालय (जीएचक्यू) पर भी भीड़ ने हमला किया था।
पुलिस ने दावा किया है कि हिंसक संघर्ष में 10 लोगों की जान गई, जबकि खान की पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) का कहना है कि सुरक्षाबलों की गोलीबारी में उसके 40 कार्यकर्ता मारे गए।
इस बीच, रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने रविवार को कहा कि सैन्य प्रतिष्ठानों पर हमला करने वालों पर मुकदमा चलाने के लिए कोई नई सैन्य अदालत स्थापित नहीं की जा रही है।
अपने गृह नगर सियालकोट में आसिफ ने पत्रकारों से कहा कि ऐसी अदालतें पिछले 75 वर्ष से काम कर रही हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘ कोई नई सैन्य अदालतें स्थापित नहीं की जा रही हैं। कानून पहले से मौजूद है। अदालतें मौजूद हैं और वे पिछले 75 वर्षों से लगातार काम कर रही हैं।’’
मंत्री ने इस धारणा को भी खारिज करने की कोशिश की कि सरकार लोगों के बुनियादी अधिकारों को छीनने की कोशिश कर रही है।
उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों के खिलाफ मामले चलाए जाएंगे जिनके चेहरे ‘‘सैन्य प्रतिष्ठानों पर हमला करते समय फुटेज में नजर आ रहे हैं।’’
मंत्री ने कहा कि सैन्य अदालतों द्वारा दोषी ठहराए गए लोगों को उच्च न्यायालयों और फिर उच्चतम न्यायालय में फैसले को चुनौती देने का अधिकार होगा।
जनरल मुनीर ने रविवार को जिन्ना हाउस और अन्य सैन्य प्रतिष्ठानों का भी दौरा किया, जिन पर भीड़ ने हमला किया था और तोड़फोड़ की थी। उन्हें नौ मई की घटनाओं के बारे में भी जानकारी दी गई।
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