यह सिर्फ मैच नहीं, बल्कि लड़कियों के लिए इतिहास रचने का मौका है

महिला क्रिकेट विश्व कप का फाइनल मैच सिर्फ एक आम मैच नहीं, इसमें वो देश खेल रहे हैं जहां हर क्षेत्र में, खासकर खेल में, महिला सशक्तिकरण की सख्त जरूरत है, और यह मैच उसे एक नया मोड़ दे सकता है.

प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credit: Image File)

महिला क्रिकेट विश्व कप का फाइनल मैच सिर्फ एक आम मैच नहीं, इसमें वो देश खेल रहे हैं जहां हर क्षेत्र में, खासकर खेल में, महिला सशक्तिकरण की सख्त जरूरत है, और यह मैच उसे एक नया मोड़ दे सकता है.भारत के नवी मुंबई में हो रहा महिला क्रिकेट विश्व कप का फाइनल एक ऐतिहासिक मौका बनने जा रहा है. टीम इंडिया और दक्षिण अफ्रीका पहली बार इस खिताब के लिए आमने-सामने हैं. एक महीने तक चले इस टूर्नामेंट के बाद दोनों के पास अब इतिहास रचने का सुनहरा अवसर है.

भारत था जीत के करीब दो बार

भारत इससे पहले दो बार वनडे विश्व कप के फाइनल तक पहुंचा है. दोनों ही बार भारत को हार का सामना करना पड़ा. एक बार 2005 में ऑस्ट्रेलिया से और एक बार 2017 में इंग्लैंड से. वहीं 2020 में टीम इंडिया टी-20 विश्व कप फाइनल में भी ऑस्ट्रेलिया से हार चुकी है.

इस बार हरमनप्रीत कौर की कप्तानी में टीम तीसरी बार फाइनल में उतर रही है. हरमनप्रीत ने शनिवार को समाचार एजेंसी रॉयटर्स से कहा, "हम बहुत अच्छी तरह जानते हैं कि हारने के बाद कैसा लगता है, लेकिन जीत के बाद का एहसास ही है जिसके लिए हम सब खेलते हैं और यही पल हमारे लिए सबसे अहम है.”

टीम इंडिया पर ज्यादा दबाव

दक्षिण अफ्रीका की टीम भी पिछले दो बार लगातार टी-20 विश्व कप के फाइनल तक पहुंची है, लेकिन जीती नहीं. 2023 में ऑस्ट्रेलिया और 2024 में न्यूजीलैंड से हारने के बाद अब वह पहली बार 50 ओवर के विश्व कप फाइनल में उतरी है. टीम की कप्तान लॉरा वोल्वार्ड्ट ने रॉयटर्स से कहा, "पूरा स्टेडियम भारत के समर्थकों से खचाखच भरा होगा, लेकिन यह हमारे लिए फायदे की बात हो सकती है क्योंकि दबाव भारत पर ज्यादा रहेगा.” उन्होंने आगे कहा, "हर मैच की शुरुआत शून्य से होती है और नॉकआउट क्रिकेट में कुछ भी संभव है, जैसे पिछले दिनों जेमिमा रोड्रिग्ज ने कमाल कर दिखाया.”

वोल्वार्ड्ट की यह बात सही भी लगती है क्योंकि दोनों टीमों का सफर काफी दिलचस्प रहा है. भारत ने लीग में चौथे स्थान पर रहकर सेमीफाइनल में जगह बनाई और फिर महिलाओं के वनडे इतिहास का सबसे बड़ा रन चेज करते हुए सात बार की चैंपियन ऑस्ट्रेलिया को हराकर फाइनल में पहुंचा. उस मैच में हरमनप्रीत कौर और जेमिमा रोड्रिग्स की साझेदारी ने इतिहास रच दिया. दूसरी ओर, दक्षिण अफ्रीका ने सेमीफाइनल में चार बार की चैंपियन इंग्लैंड को 125 रनों से हराया था, जिसमें वोल्वार्ड्ट ने 143 गेंदों में 169 रन की धमाकेदार पारी खेलकर ‘प्लेयर ऑफ द मैच' का खिताब जीता.

"दो साल से इस दिन का इंतजार था”

हरमनप्रीत कौर का कहना है कि टीम इंडिया ने पिछले दो साल से इसी दिन के लिए तैयारी की है. उन्होंने कहा, "पिछली बार जब हम फाइनल खेले थे, तब भारत में महिला क्रिकेट को लेकर माहौल ही बदल गया था. बहुत सी लड़कियां मैदानों पर आखिरकार उतरने लगी थीं. मुझे पूरा भरोसा है कि अगर हम यह फाइनल जीतते हैं, तो महिला क्रिकेट को एक और बड़ी उड़ान मिलेगी. ना सिर्फ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बल्कि भारत के भीतर भी सुधार दिखेगा.”

यह बात उस बदलते भारत की भी झलक दिखाती है जहां अब महिला क्रिकेट को पहले जैसी ‘साइडलाइन' या निचली निगाह से नहीं देखा जाता. वहीं, दक्षिण अफ्रीका के लिए भी यह मुकाबला उतना ही अहम है. देश ने अब तक ना तो पुरुषों के मैच में कोई विश्व कप जीता है और ना ही महिलाओं की श्रेणी में. वोल्वार्ड्ट ने कहा, "हाल ही में हमारे देश में महिला खिलाड़ियों को डोमेस्टिक खेलों के कॉन्ट्रैक्ट मिलने शुरू हुए हैं. अगर हम यह ट्रॉफी जीतते हैं, तो यह दक्षिण अफ्रीका में महिला क्रिकेट के लिए ऐतिहासिक मोड़ साबित होगा. बहुत सी लड़कियां हमें टीवी पर देखकर प्रेरित होंगी और कहेंगी कि दक्षिण अफ्रीका भी अब वर्ल्ड कप विजेता है.”

नया इतिहास लिखने को तैयार दोनों टीमें

चाहे ट्रॉफी नीले रंग में उठे या हरे रंग में, एक बात तय है—महिला क्रिकेट को इस मैच के बाद एक नया विश्व चैंपियन मिलेगा और शायद दुनियाभर में कई लड़कियों को अपने घरवालों से कहने का मौका मिलेगा कि वो भी मैदान में उतारकर विश्व स्तर पर नाम कमा सकती हैं, वर्ल्ड कप उठा सकती हैं. यह मैच महिलाओं की आगे आने वाली पीढ़ियों को मैदान की ओर ले कर जाने और उनके जीतने का सपना साकार करने का दम रखता है.

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