देश की खबरें | यह कोई लीक नहीं है, तथ्यों को स्पष्ट करने के लिए जारी की गई थी विज्ञप्ति : पुलिस ने अदालत को बताया

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. दिल्ली पुलिस ने उच्च न्यायालय को बुधवार को बताया कि मीडिया को जारी प्रेस विज्ञप्ति कोई लीक नहीं है, जैसा कि पिंजरा तोड़ समूह की महिला सदस्य आरोप लगा रही हैं, बल्कि यह तथ्यों को स्पष्ट करने के लिए जारी किया गया था।

नयी दिल्ली, 15 जुलाई दिल्ली पुलिस ने उच्च न्यायालय को बुधवार को बताया कि मीडिया को जारी प्रेस विज्ञप्ति कोई लीक नहीं है, जैसा कि पिंजरा तोड़ समूह की महिला सदस्य आरोप लगा रही हैं, बल्कि यह तथ्यों को स्पष्ट करने के लिए जारी किया गया था।

पिंजरा तोड़ समूह के कुछ सदस्य संशोधित नागरिकता कानून के विरोध में प्रदर्शनों के दौरान हिंसा के मामले में गिरफ्तार किए गए हैं।

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दिल्ली पुलिस ने बताया कि जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय की छात्रा और पिंजरा तोड़ समूह की सदस्य देवांगन कलिता के खिलाफ लगाए गए आरोपों को जांच एजेंसी ने पहले सार्वजनिक नहीं किया, बल्कि समूह के सदस्यों ने ही इस बारे में सोशल मीडिया पर चर्चा की।

न्यायमूर्ति विभू बाखरु की अदालत में करीब दो घंटे चली सुनवाई के दौरान पुलिस ने उक्त बातें कहीं। न्यायमूर्ति ने नौ जुलाई को कलिता की याचिका के जवाब में पुलिस द्वारा दायर हलफनामे में लगाए गए आरोपों को ‘‘अनुचित’’ बताया था। छात्रा ने आरोप लगाया था कि एजेंसी ने उनके खिलाफ कुछ तथाकथित साक्ष्य मीडिया में लीक किए हैं।

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दिल्ली पुलिस की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल अमन लेखी ने अदालत को बताया कि मामले के संबंध में दो जून को मीडिया को जारी प्रेस नोट कलिता को नुकसान पहुंचाने या उनकी छवि खराब करने के लिए नहीं बल्कि उन तथ्यों को स्पष्ट करने के लिए जारी किया गया था जिन्हें पिंजरा तोड़ समूह के सदस्यों ने सोशल मीडिया पर डाला था। ऐसा इसलिए किया गया था क्योंकि इससे संस्था की जवाबदेही जुड़ी थी।

उन्होंने कहा कि पुलिस ने ऐसा सिर्फ तथ्यों को सही तरीके से रखने के लिए किया ताकि जनता की भावनाएं ना भड़कें।

लेखी ने कहा कि समूह ने अपने ट्वीट में ‘‘मतभेद रखने वालों का अपराधिकरण और लोकतांत्रिक कार्यकर्ताओं के खिलाफ मुकदमे बंद करें’’ और ‘‘हिन्दुत्व मशीनरी’’ जैसे शब्दों का प्रयोग किया था जो स्वीकार्य नहीं है और कोई भी पुलिस बल को साम्प्रदायिक कैसे करार दे सकता है।

लेखी और अन्य वकीलों ने अदालत को बताया कि उन टिप्पणियों के कारण प्रेस विज्ञपति जारी करना अनिवार्य था और यह विज्ञप्ति 480 लोगों के पास गयी है जो पुलिस और मीडियाकर्मियों के व्हाट्सऐप समूह में शामिल हैं।

अदालत ने कलिता के वकील आदित एस. पुजारी की दलीलें सुनने के लिए अगली सुनवाई कल, बृहस्पतिवार को करना तय किया है।

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