देश की खबरें | मेरे लिए साल 2022 अंधकारमय और सबसे कठिन समय था: करुण नायर
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नयी दिल्ली, 16 जून भारतीय बल्लेबाज करुण नायर के लिए बीते कुछ समय से घरेलू क्रिकेट में बड़े स्कोर का सिलसिला उनके करियर की सबसे बड़ी चुनौती से जुड़ा हुआ है लेकिन इस दायें हाथ के बल्लेबाज ने ‘साल ‘2022’ के अंत को अपने करियर का सबसे मुश्किल और अंधकारमय समय करार दिया।
नायर का आठ साल बाद भारतीय टेस्ट टीम में वापसी का सफर उनके जज्बे और दृढ़ संकल्प का प्रमाण है।
पूर्व दिग्गज स्पिनर रविचंद्रन अश्विन को दिये साक्षात्कार में इस 33 साल के बल्लेबाज ने कहा, ‘‘ मेरे साथ जिस तरह की घटनाएं घटी उस संबंध में मैं कहूंगा कि 2022 का अंत काफी अंधकारमय था। मेरे लिए बहुत भावनात्मक दौर था। मुझे लगता है कि मेरे लिए यह सबसे कठिन समय था। 2018 से भी अधिक कठिन, सबसे मुश्किल दौर।’’
टेस्ट क्रिकेट में वीरेंद्र सहवाग के अलावा भारत के एकमात्र तिहरे शतक लगाने वाले नायर अब शानदार वापसी की दहलीज पर हैं। इस बात की प्रबल संभावना है कि वह शुक्रवार को लीड्स में इंग्लैंड के खिलाफ शुरू होने वाले पहले टेस्ट के लिए भारत की एकादश का हिस्सा होंगे।
नायर पहले से अधिक मजबूत बनकर उभरे हैं, लेकिन वह उस समय में वापस नहीं जाना चाहेंगे जब वह अक्सर इस बात पर हैरान होते थे कि 2016 में इंग्लैंड के खिलाफ टेस्ट पदार्पण के बाद यादगार तिहरा शतक लगाने के बावजूद उन्हें कुछ मैचों के बाद ही टीम से बाहर क्यों कर दिया गया था।
उन्होंने कहा, ‘‘ नहीं। मैं ईमानदारी से कहूं तो उस जगह पर नहीं रहना चाहता जहां मैं कुछ साल पहले था।’’
उन्होंने कहा, ‘‘मुझे लगता है कि इस समय कम से कम मैं बहुत आभारी हूं। मैं शिकायत करने के उस दौर से आगे निकल चुका हूँ। मैं अपना जीवन जी रहा हूं और वही कर रहा हूं जो मुझे पसंद है।’’
नायर ने कहा, ‘‘मैं उन सभी का बहुत आभारी हूँ जो कम से कम पिछले दो-तीन वर्षों में मेरी यात्रा का हिस्सा रहे हैं। मैंने चीजों को महत्व देना सीख लिया है। मैंने हर पल को महत्व देना सीख लिया है।’’
नायर के लिए टेस्ट क्रिकेट में शानदार आगाज के बाद बिना किसी स्पष्टीकरण के भारतीय टीम बाहर होना हैरान करने वाला था।
उन्होंने कहा, ‘‘ईमानदारी से कहूं तो मैं समझ नहीं पाया कि क्या हो रहा था। चेन्नई में 300 रन बनाने के बाद, ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ श्रृंखला थी और फिर टीम को 2017 में श्रीलंका के खिलाफ खेलना था।’’
उन्होंने कहा, ‘‘मैं उस टीम (श्रीलंका श्रृंखला) का हिस्सा भी नहीं था। मैं समझ नहीं पाया कि क्या हो रहा था। फिर मुझे घरेलू क्रिकेट में वापस जाना पड़ा।’’
नायर को लगता है कि वह ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ टेस्ट श्रृंखला में बड़े स्कोर के साथ भारतीय टीम में अपनी जगह पक्की कर सकते थे।
उन्होंने कहा, ‘‘मुझे नहीं पता था कि क्या हो रहा था। मुझे बस इतना पता था कि मेरा नाम उसमें नहीं था। मैं समझ नहीं पाया कि यह कैसे नहीं था।’’
उन्होंने कहा, ‘‘ मैं जब पीछे मुड़कर देखता हूं और सोचता हूं कि मुझे ज्यादा मौके नहीं मिले। इसका हालांकि दूसरा पक्ष यह है कि ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ चार पारियों में मैं अच्छी शुरुआत को बड़े स्कोर में नहीं बदल पाया था।
उन्होंने कहा, ‘‘ मैंने अगर उनमें से दो पारी में बड़ा स्कोर बनाया होता तो शायद टीम में मेरी जगह पक्की हो जाती। ’’
आनन्द सुधीर
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