देश की खबरें | अंसारी को दोषी करार देने के उच्च न्यायालय के फैसले पर शीर्ष अदालत ने लगाई अंतरिम रोक

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. उच्चतम न्यायालय ने पिस्तौल तानकर एक जेलर को धमकाने के मामले में उत्तर प्रदेश के पूर्व विधायक मुख्तार अंसारी को दोषी करार देने तथा सात साल कारावास की सजा सुनाने के इलाहाबाद उच्च न्यायालय के फैसले पर सोमवार को अंतरिम रोक लगा दी।

नयी दिल्ली, दो जनवरी उच्चतम न्यायालय ने पिस्तौल तानकर एक जेलर को धमकाने के मामले में उत्तर प्रदेश के पूर्व विधायक मुख्तार अंसारी को दोषी करार देने तथा सात साल कारावास की सजा सुनाने के इलाहाबाद उच्च न्यायालय के फैसले पर सोमवार को अंतरिम रोक लगा दी।

न्यायमूर्ति बी आर गवई और न्यायमूर्ति विक्रम नाथ की पीठ ने उच्च न्यायालय के आदेश पर रोक लगाने की अंसारी की याचिका पर उत्तर प्रदेश सरकार को नोटिस भी जारी किया।

न्यायमूर्ति गवई ने राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता गरिमा प्रसाद से कहा कि उच्च न्यायालय के फैसले में कहीं भी यह नहीं कहा गया है कि अंसारी को बरी करने का निचली अदालत का आदेश कानून के प्रतिकूल था।

उन्होंने कहा, ‘‘यह स्थापित कानून है कि निचली अदालत के बरी करने के आदेश में हस्तक्षेप करते समय अपीलीय अदालत को कहना होता है कि निचली अदालत का फैसला कानून के विपरीत है। हमें उच्च न्यायालय के फैसले में यह नजर नहीं आया।’’

अंसारी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने कहा कि शिकायतकर्ता और किसी भी गवाह ने घटना की पुष्टि नहीं की, लेकिन उच्च न्यायालय ने निचली अदालत के बरी करने के आदेश में हस्तक्षेप किया और अंसारी को कथित अपराध के लिए दोषी करार देकर सजा सुनाई।

पीठ ने कहा कि वह अंसारी की याचिका पर राज्य सरकार के जवाब को देखना चाहेगी और उसके बाद ही अंतिम आदेश सुनाएगी।

अंसारी ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ के पिछले साल 21 सितंबर के आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें निचली अदालत के आदेश को रद्द कर दिया गया था।

न्यायालय ने जेलर को जान से मारने की धमकी देने के मामले में अंसारी को 37 हजार रुपये जुर्माने की सजा भी सुनाई थी।

मामले के मुताबिक, 2003 में लखनऊ के तत्कालीन जेलर एस के अवस्थी ने आलमबाग थाने में अंसारी के खिलाफ मामला दर्ज कराया था, जिसमें उन्होंने आरोप लगाया था कि जेल में मुख्तार अंसारी से मिलने आए लोगों की तलाशी लेने का आदेश देने पर उन्हें जान से मारने की धमकी दी गई थी।

अवस्थी ने यह भी आरोप लगाया था कि अंसारी ने उनसे गाली-गलौज करते हुए उन पर पिस्तौल भी तान दी थी। इस मामले में निचली अदालत ने अंसारी को बरी कर दिया था, जिसके खिलाफ सरकार ने अपील दाखिल की थी।

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