विदेश की खबरें | संरा दूत ने कहा, यमन के युद्ध की तरफ लौटने का खतरा ‘वास्तविक’

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on world at LatestLY हिन्दी. ग्रुंदबर्ग ने सऊदी अरब की राजधानी रियाद में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त यमन के राष्ट्रपति के नेतृत्व वाली परिषद के प्रमुख रशद अल-अलीमी और ओमान की राजधानी मस्कट में हूती विद्रोहियों के मुख्य वार्ताकार मोहम्मद अब्दुल-सलाम से मुलाकात के बाद यह चेतावनी दी। उन्होंने युद्धरत पक्षों पर संघर्ष-विराम के विस्तार का दबाव बनाने के लिए सऊदी और ओमानी अधिकारियों के साथ भी बैठक की।

श्रीलंका के प्रधानमंत्री दिनेश गुणवर्धने

ग्रुंदबर्ग ने सऊदी अरब की राजधानी रियाद में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त यमन के राष्ट्रपति के नेतृत्व वाली परिषद के प्रमुख रशद अल-अलीमी और ओमान की राजधानी मस्कट में हूती विद्रोहियों के मुख्य वार्ताकार मोहम्मद अब्दुल-सलाम से मुलाकात के बाद यह चेतावनी दी। उन्होंने युद्धरत पक्षों पर संघर्ष-विराम के विस्तार का दबाव बनाने के लिए सऊदी और ओमानी अधिकारियों के साथ भी बैठक की।

ग्रुंदबर्ग ने एक बयान जारी कर कहा कि उन्होंने संघर्ष-विराम को लंबी अ‍वधि के लिए जारी रखने से जुड़े संयुक्त राष्ट्र के एक प्रस्ताव पर चर्चा की, ताकि “यमन के लोगों को विभिन्न प्राथमिकताओं के संबंध में प्रगति करने का मौका मिल सके।”

उन्होंने कहा, “हम एक ऐसे दोराहे पर खड़े हैं, जहां युद्ध की तरफ लौटने का खतरा वास्तविक है और मैं युद्धरत पक्षों से आग्रह करता हूं कि वे एक ऐसा विकल्प चुनें, जो यमन के लोगों की जरूरतों को प्राथमिकता देता हो।”

संघर्ष-विराम को विस्तार देने के प्रयास ऐसे समय में हो रहे हैं, जब दोनों पक्षों ने अपने-अपने नियंत्रण वाले क्षेत्रों में सैन्य परेड आयोजित की हैं। अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त सरकार ने उत्तरी यमन में इमामत शासन के खिलाफ 1962 के विद्रोह की वर्षगांठ पर परेड निकाली।

वहीं, हूती विद्रोहियों ने 2014 में राजधानी सना पर कब्जे की वर्षगांठ के उपलक्ष्य में एक बड़ी सैन्य परेड आयोजित की, जिसमें मिसाइल और ड्रोन सहित विभिन्न हथियार प्रदर्शित किए गए। ये हथियार ईरान द्वारा निर्मित हथियारों से मेल खाते थे, जिसे युद्ध में हूती विद्रोहियों का मुख्य समर्थक माना जाता है।

हालांकि, संयुक्त राष्ट्र के दूत ने संघर्ष-विराम के विस्तार से संबंधित प्रस्ताव के बारे में कोई विवरण नहीं दिया।

सरकार के वार्ताकार नबील जमेल ने बताया कि संयुक्त राष्ट्र के प्रस्ताव में हूती विद्रोहियों के कब्जे वाले क्षेत्रों में गैर-सैन्य कर्मियों को भुगतान करने के तरीके तय करना और ताइज सहित अन्य प्रांतों में बंद शहरों की सड़कों को फिर से खोलना शामिल है।

ताइज और अन्य प्रांतों की सड़कों को फिर से खोलना संयुक्त राष्ट्र की मध्यस्थता में हुए संघर्ष-विराम समझौते का हिस्सा है, जो अप्रैल की शुरुआत में अमल में आया था और जिसे दो बार बढ़ाया जा चुका है। दूसरी बार इस संघर्ष-विराम की अवधि दो अक्टूबर तक के लिए बढ़ाई गई थी। हालांकि, दोनों पक्षों ने कई मौकों पर संघर्ष-विराम के उल्लंघन की सूचना दी है।

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