विदेश की खबरें | ‘‘मोसाद की एक खोज के ‘भटकने’ से सीरियाई परमाणु कार्यक्रम की जानकारी मिली थी’’
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on world at LatestLY हिन्दी. इजराइली खुफिया एजेंसी मोसाद के एक पूर्व वरिष्ठ अधिकारी अम्नोन सोफ्रिन ने पाकिस्तानी परमाणु वैज्ञानिक ए. क्यू. खान को 'मुसीबत की जड़’ करार देते हुए खुलासा किया है कि एजेंसी की एक खोज के दूसरी दिशा में मुड़ जाने के कारण सीरियाई परमाणु कार्यक्रम की जानकारी मिली थी और उसके बाद यहूदी राज्य के अस्तित्व पर आने वाले एक संभावित खतरे को टाल दिया गया था।
यरूशलम, 10 अक्टूबर इजराइली खुफिया एजेंसी मोसाद के एक पूर्व वरिष्ठ अधिकारी अम्नोन सोफ्रिन ने पाकिस्तानी परमाणु वैज्ञानिक ए. क्यू. खान को 'मुसीबत की जड़’ करार देते हुए खुलासा किया है कि एजेंसी की एक खोज के दूसरी दिशा में मुड़ जाने के कारण सीरियाई परमाणु कार्यक्रम की जानकारी मिली थी और उसके बाद यहूदी राज्य के अस्तित्व पर आने वाले एक संभावित खतरे को टाल दिया गया था।
इजराइली सुरक्षा बलों ने ऑपरेशन 'आउटसाइड द बॉक्स' के तहत सितंबर 2007 में सीरिया के देर अजोर में रिएक्टर पर बम बरसाए थे।
सोफ्रिन ने टाइम्स ऑफ़ इजराइल के सहयोगी प्रकाशन जमान इजराइल से कहा कि अब्दुल कदीर खान ‘मुसीबत की जड़’ थे और वह दुनिया भर में जहां भी गए, उन पर नजर रखने की जरूरत थी।
उन्होंने करीब 15 साल पहले सीरियाई परमाणु रिएक्टर का पता लगाए जाने और उसे तबाह किए जाने की घटनाओं का सिलसिलेवार जिक्र किया। उन्होंने यह भी जिक्र किया कि इजरायल किस प्रकार अपनी सबसे बड़ी खुफिया भूलों में से एक के कितना करीब पहुंच गया था।
सोफ्रिन सैन्य खुफिया विभाग से छुट्टी मिलने के बाद मोसाद में शामिल हुए थे। उन्होंने कहा कि तत्कालीन प्रधानमंत्री एहुद ओलमर्ट को सूचित किया गया था कि कुछ ही सप्ताह में सीरिया परमाणु-सक्षम राष्ट्र बनने वाला है।
उन्होंने कहा कि दिसंबर 2003 में ब्रिटेन और अमेरिका ने घोषणा की थी कि वे लीबियाई नेता मुअम्मर कज्जाफी को यह समझाने में कामयाब रहे हैं कि यदि वह परमाणु हथियारों की अपनी योजना को छोड़ देते हैं तो लीबिया पर लगे प्रतिबंध हटा लिए जाएंगे। उन्होंने कहा कि उस समय इजरायली खुफिया एजेंसी को इस संबंध में कोई जानकारी नहीं थी।
सोफ्रिन ने कहा, "अमेरिकी घोषणा के साथ ही हमने महसूस किया कि लीबिया के कार्यक्रम में पाकिस्तानी करीब से जुड़े हुए थे।’’ उन्होंने कहा कि इस परियोजना के पीछे पाकिस्तानी वैज्ञानिक खान थे जिन्होंने परमाणु संबंधी अपनी जानकारी बेच दी थी।
पूर्व खुफिया अधिकारी ने कहा, "मैंने तथ्यों पर गौर किया और खुद से सवाल किया, अगर डॉ खान प्रोजेक्ट मैनेजर हैं, तो पता करते हैं कि वह मध्य पूर्व में और कहां-कहां गए हैं।’’"
इसने आगे की जांच में उत्प्रेरक का काम किया। उन्होंने कहा कि त्वरित जांच के बाद पता लगा कि उन्होंने तीन देशों -मिस्र, सऊदी अरब और सीरिया की यात्रा की। मिस्र और सऊदी अरब को लेकर उन्हें कोई संशय नहीं था क्योंकि दोनों देश अमेरिका पर निर्भर थे और उन्हें अमेरिका का डर भी था।
उन्होंने कहा कि इजराइल को 2000 के दशक की शुरुआत में सीरिया की परमाणु गतिविधियों के बारे में तीसरे पक्ष से कुछ जानकारी मिली थी लेकिन वह ‘प्रारंभिक" थी और उस आधार पर कोई खुफिया ऑपरेशन शुरू करना संभव नहीं था।
सोफ्रिन के अनुसार इजराइल ने सीरियाई गतिविधियों और उसमें पाकिस्तानी भूमिका पर नजर रखी और फरवरी 2004 में मोसाद ने सीरिया में परमाणु परियोजना के संबंध में पहली चेतावनी जारी की।
उन्होंने कहा कि सीरिया परमाणु संपन्न होने की कगार पर था और ओलमर्ट ने अमेरिका से रिएक्टर पर हमला करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा, ‘‘लेकिन जॉर्ज डब्ल्यू बुश (तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति) ने इनकार कर दिया और ओलमर्ट ने इस वाक्य के साथ उनके साथ बातचीत समाप्त कर दी कि इजरायल को जो करना है, वह करेगा।’’
इसके बाद इजराइली बलों ने ऑपरेशन ‘आउटसाइड द बॉक्स’के तहत छह सितंबर, 2007 को सीरियाई रिएक्टर पर बमबारी कर उसे तबाह कर दिया।
(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)