देश की खबरें | उच्चतम न्यायालय ने आरोपी को जेल में रखने के लिए पीएमएलए के इस्तेमाल पर सवाल उठाए
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. उच्चतम न्यायालय ने एक आरोपी को जेल में रखने के लिए धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) का इस्तेमाल करने के लिए ईडी की आलोचना की और सवाल किया कि क्या दहेज निषेध कानून की तरह इस प्रावधान का भी "दुरुपयोग" किया जा रहा है।
नयी दिल्ली, 13 फरवरी उच्चतम न्यायालय ने एक आरोपी को जेल में रखने के लिए धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) का इस्तेमाल करने के लिए ईडी की आलोचना की और सवाल किया कि क्या दहेज निषेध कानून की तरह इस प्रावधान का भी "दुरुपयोग" किया जा रहा है।
न्यायमूर्ति अभय एस. ओका और न्यायमूर्ति उज्ज्वल भुइयां की पीठ ने बुधवार को छत्तीसगढ़ के पूर्व आबकारी अधिकारी अरुण पति त्रिपाठी को जमानत देते हुए यह टिप्पणी की।
शीर्ष अदालत ने इस बात पर आश्चर्य व्यक्त किया कि अगर शिकायत पर संज्ञान लेने वाले अदालती आदेश को छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने रद्द कर दिया था, तो आरोपी को हिरासत में कैसे रखा गया।
पीठ ने पूछा, "व्यक्ति को जेल में रखना पीएमएलए की अवधारणा नहीं हो सकती। अगर संज्ञान रद्द होने के बाद भी व्यक्ति को जेल में रखने की प्रवृत्ति है, तो क्या ही कहा जा सकता है? देखें कि 498ए मामलों में क्या हुआ था, पीएमएलए का भी उसी तरह दुरुपयोग किया जा रहा है?"
भारतीय दंड संहिता की धारा 498ए विवाहित महिलाओं को पतियों और उनके रिश्तेदारों की क्रूरता से बचाती है।
सुनवाई के दौरान प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने जमानत देने का विरोध करते हुए कहा कि तकनीकी आधार पर अपराधी बच नहीं सकते।
राजू ने कहा कि मंजूरी के अभाव में संज्ञान रद्द कर दिया गया था और यह जमानत के लिए अप्रासंगिक है।
पीठ ने नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा, "यह चौंकाने वाला है कि ईडी को पता है कि संज्ञान रद्द कर दिया गया था, फिर भी इसे दबा दिया गया। हमें अधिकारियों को तलब करना चाहिए। ईडी को साफ-साफ बताना चाहिए।"
शीर्ष अदालत की पीठ ने कहा, "हम क्या दिखाना चाह रहे हैं? संज्ञान लेने का आदेश रद्द किया जा चुका है, फिर भी व्यक्ति हिरासत में है।"
शीर्ष अदालत भारतीय दूरसंचार सेवा के अधिकारी त्रिपाठी की अपील पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें उन्होंने राज्य में चर्चित आबकारी घोटाले के सिलसिले में जमानत देने से इनकार करने वाले छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती दी थी।
प्रतिनियुक्ति पर छत्तीसगढ़ राज्य विपणन निगम लिमिटेड के विशेष सचिव और प्रबंध निदेशक रहे त्रिपाठी को ईडी ने जांच के बाद गिरफ्तार किया था।
ईडी ने आर्थिक अपराध शाखा, रायपुर द्वारा भारतीय दंड संहिता और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की कई धाराओं के तहत दर्ज एक पूर्व निर्धारित अपराध के आधार पर जांच शुरू की।
संघीय एजेंसी ने आरोप लगाया कि वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों, निजी व्यक्तियों और राजनीतिक पदाधिकारियों के एक आपराधिक सिंडिकेट ने शराब के व्यापार से अवैध कमाई करने के लिए राज्य की आबकारी नीतियों में हेरफेर किया।
(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)