कोलकाता, छह मई कलकत्ता उच्च न्यायालय की एकल पीठ ने मुर्शिदाबाद सांप्रदायिक हिंसा में मारे गए पिता-पुत्र के परिवार को पुलिस द्वारा परेशान करने का आरोप लगाने वाली याचिका पर सुनवाई से मंगलवार को इनकार कर दिया।
याचिका में दावा किया गया कि विधाननगर पुलिस आयुक्तालय के कर्मी साल्ट लेक इलाके में पीड़ित परिवार को परेशान कर रहे हैं।
न्यायमूर्ति तीर्थंकर घोष ने कहा कि चूंकि उच्च न्यायालय की एक खंडपीठ पहले से ही मुर्शिदाबाद की घटनाओं से संबंधित मुद्दों पर सुनवाई कर रही है और वर्तमान याचिकाकर्ता वहां हिंसा की कथित पीड़िताएं हैं, इसलिए यह उचित होगा कि मामले की सुनवाई उनकी एकल पीठ द्वारा न की जाए।
न्यायमूर्ति घोष ने अपनी अदालत से याचिका को वापस लेने का आदेश देते हुए निर्देश दिया कि इससे संबंधित रिकॉर्ड मुख्य न्यायाधीश के समक्ष रखे जाएं।
बिधाननगर पुलिस आयुक्तालय की कथित कार्रवाई पर हरगोविंद दास और चंदन की पत्नियों ने उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर आरोप लगाया कि पुलिस आयुक्तालय ने उन्हें डराने धमकाने का प्रयास किया।
हरगोविंद और उनके बेटे चंदन की 12 अप्रैल को मुर्शिदाबाद जिले के शमसेरगंज के जाफराबाद में दंगाइयों ने हत्या कर दी थी।
न्यायमूर्ति घोष के समक्ष बताया गया कि मृतकों के परिवार के सदस्य उच्च न्यायालय में याचिका दायर करने के उद्देश्य से साल्ट लेक आए हैं और वहां एक घर में रह रहे हैं।
पीड़ित परिवार के वकील बिलवादल भट्टाचार्य ने अदालत के समक्ष कहा कि बिधाननगर पुलिस आयुक्तालय के पुलिसकर्मियों द्वारा घर का दरवाजा तोड़ दिया गया और दोनों मृतकों के परिवार के सदस्यों के साथ गाली-गलौज की गई।
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