विदेश की खबरें | बांग्लादेश में अंतरिम सरकार पर अल्पसंख्यकों की सुरक्षा करने में विफल रहने का आरोप

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on world at LatestLY हिन्दी. ‘बांग्लादेश हिंदू बौद्ध ईसाई एकता परिषद’ ने कहा कि नोबेल शांति पुरस्कार विजेता मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली सरकार अल्पसंख्यक समूहों को दबाने के लिए सरकारी संस्थानों का भी इस्तेमाल कर रही है।

श्रीलंका के प्रधानमंत्री दिनेश गुणवर्धने

‘बांग्लादेश हिंदू बौद्ध ईसाई एकता परिषद’ ने कहा कि नोबेल शांति पुरस्कार विजेता मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली सरकार अल्पसंख्यक समूहों को दबाने के लिए सरकारी संस्थानों का भी इस्तेमाल कर रही है।

यूनुस ने पिछले साल छात्रों के नेतृत्व में हुए विद्रोह के बाद सत्ता संभाली थी, जिसमें सैकड़ों लोग मारे गए थे और पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को पांच अगस्त को भारत में शरण लेनी पड़ी। इसके साथ ही उनके 15 साल का शासन खत्म हो गया।

परिषद ने पहले कहा था कि चार से 20 अगस्त के बीच मुस्लिम बहुल देश में सांप्रदायिक हिंसा की 2,010 घटनाएं हुईं।

वहीं, यूनुस के नेतृत्व वाली सरकार ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा कि ज्यादातर घटनाएं सांप्रदायिक कारणों से नहीं बल्कि ‘‘राजनीतिक कारणों’’ से हुईं।

बृहस्पतिवार को संवाददाता सम्मेलन में परिषद ने पूर्व में हुए हमलों के अपने दावे को दोहराया और कहा कि पिछले वर्ष 21 अगस्त से 31 दिसंबर के बीच सांप्रदायिक हिंसा की 174 नयी घटनाएं हुईं, जिनमें अल्पसंख्यक समूहों के 23 सदस्य मारे गए और नौ महिलाओं से बलात्कार किया गया।

इसने कहा कि अन्य घटनाओं में आगजनी, तोड़फोड़, लूटपाट और संपत्ति और व्यवसायों पर जबरन कब्जा करना शामिल था।

इसने कहा कि अल्पसंख्यक समूहों के कम से कम 15 सदस्यों को इस्लाम को कमजोर करने के आरोप में या तो गिरफ्तार किया गया या उन्हें प्रताड़ित किया गया।

परिषद के कार्यवाहक महासचिव मनिंद्र कुमार नाथ ने सरकार पर अल्पसंख्यक समूहों के लोगों को परेशान करने के लिए सरकारी संस्थानों में अपने लोगों को नियुक्त करने का आरोप लगाया।

नाथ ने कहा कि कई अल्पसंख्यक नेता अपने खिलाफ झूठे आरोपों के कारण छिप गए हैं। अंतरिम सरकार ने कहा है कि उन पर विशेष आरोप हैं और उन्हें किसी सांप्रदायिक कारण से निशाना नहीं बनाया गया।

बांग्लादेश की 17 करोड़ आबादी में आठ प्रतिशत से भी कम हिंदू हैं।

अंतरिम सरकार में कई लोग इस बात से नाखुश हैं कि भारत हसीना को शरण दे रहा है। उनके प्रत्यर्पण के लिए भारत से किया गया आधिकारिक अनुरोध अभी अनुत्तरित है।

एपी सुभाष संतोष

(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)

Share Now

\