देश की खबरें | झारखंड के महाधिवक्ता के खिलाफ अवमानना मामले में सुनवाई पूरी

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रांची, 31 अगस्त झारखंड के साहिबगंज की महिला थाना प्रभारी रूपा तिर्की की मौत के मामले की झारखंड उच्च न्यायालय में सुनवाई के दौरान कथित रूप से ‘मर्यादा के प्रतिकूल व्यवहार’ करने को लेकर राज्य सरकार के महाधिवक्ता राजीव रंजन और अपर महाधिवक्ता सचिन कुमार के खिलाफ अवमानना का मामला चलाने का अनुरोध करने वाली याचिका पर मंगलवार को सुनवाई पूरी हो गई और इस मामले में बुधवार को ही फैसला आने की संभावना है।

महाधिवक्ता और अपर महाधिवक्ता के खिलाफ अवमानना का मामला चलाने के लिए प्रार्थी ने अंतरिम आवेदन (इंटरलॉक्यूटरी ऐप्लिकेशन) दाखिल किया था।

आवेदन में कहा गया है कि रूपा तिर्की की मौत के मामले की सुनवाई के दौरान महाधिवक्ता रंजन और अपर महाधिवक्ता कुमार का व्यवहार अदालत की मर्यादा के प्रतिकूल था, इसलिए उनके खिलाफ अवमानना का मामला चलाया जाना चाहिए।

वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने राज्य के महाधिवक्ता और अपर महाधिवक्ता की पैरवी करते हुए कहा कि उनके मुवक्किलों के खिलाफ अवमानना का मामला नहीं चलाया जाना सबके हित में होगा। उन्होंने कहा, ‘‘उस दिन क्या हुआ, यह अदालत की जानती है। हम इसके बारे में नहीं जानना चाहते, लेकिन मेरा आग्रह है कि इस मामले को न चलाया जाए। हम इसके लिए बिना शर्त माफी मांगते हैं, लेकिन लिखित रूप में आने पर यह अदालत के रिकॉर्ड पर आ जाएगा।’’ उन्होंने कहा कि इस मामले को ‘‘अनावश्यक नहीं बढ़ाया’’ जाना चाहिए।

इस पर पीठ ने कहा, ‘‘क्या महाधिवक्ता अदालत में ऐसा व्यवहार कर सकते हैं? सवाल सिर्फ न्यायाधीश पर ही नहीं, बल्कि न्यायिक संस्था पर उठा है। इस मामले में शपथ पत्र दाखिल किया जाए।’’

इसके बाद कपिल सिब्बल ने कहा कि ‘‘प्रार्थी का आवेदन सुनवाई योग्य नहीं है। आवेदन में महाधिवक्ता और अपर महाधिवक्ता का नाम नहीं लिखा गया है, जो कि उच्च न्यायालय के नियमों के अनुसार उचित नहीं है। वहीं, किसी भी आपराधिक अवमानना मामले में महाधिवक्ता की सहमति जरूरी है, लेकिन इस मामले में महाधिवक्ता पर ही आरोप है, इसलिए अब अदालत के पास सिर्फ स्वतः संज्ञान लेते हुए अवमानना चलाने का ही विकल्प बचता’’ है, जिसकी सुनवाई अब खंडपीठ में होगी। उन्होंने कहा कि प्रार्थी के अधिवक्ता इस मामले को अनावश्यक रूप से तूल दे रहे है। इसका प्रार्थी के अधिवक्ता ने विरोध किया।

दिवंगत रूपा तिर्की के मामले की पिछली सुनवाई के दौरान महाधिवक्ता रंजन ने न्यायमूर्ति एस के द्विवेदी से कहा था कि उन्हें अब इस मामले की सुनवाई नहीं करनी चाहिए। महाधिवक्ता ने अदालत को बताया था कि 11 अगस्त को मामले की सुनवाई समाप्त होने के बाद प्रार्थी के अधिवक्ता का माइक्रोफोन ऑन रह गया था और वह अपने मुवक्किल से कह रहे थे कि इस मामले का फैसला उनके पक्ष में आना तय है और इस मामले की सीबीआई जांच दो सौ प्रतिशत तय है। उन्होंने दलील दी कि जब प्रार्थी के वकील इस तरह का दावा कर रहे हैं, तो पीठ से आग्रह होगा कि वह इस मामले की सुनवाई नहीं करें।

अदालत ने महाधिवक्ता से कहा था कि जो बात आप कह रहें हैं उसे शपथपत्र के माध्यम से अदालत में पेश करें, लेकिन महाधिवक्ता ने शपथपत्र दाखिल करने से इनकार कर दिया और कहा कि उनका मौखिक बयान ही पर्याप्त है।

इसके बाद पीठ ने महाधिवक्ता के बयान को रिकॉर्ड करते हुए इस मामले को मुख्य न्यायाधीश के पास भेज दिया। इस दौरान पीठ ने कहा कि एक आम आदमी भी अदालत पर सवाल खड़ा करे तो यह न्यायपालिका के गरिमा के अनुरूप नहीं है। उन्होंने कहा था कि जब यह सवाल उठ गया है तो मुख्य न्यायाधीश को ही निर्धारित करना चाहिए कि इस मामले की सुनवाई किस पीठ में होगी।

मुख्य न्यायाधीश डा रवि रंजन ने इस मामले को सुनवाई के लिए न्यायमूर्ति एस के द्विवेदी की पीठ में ही दोबारा भेजा है।

रूपा तिर्की के पिता देवानंद उरांव ने उच्च न्यायालय में याचिका दाखिल कर इस मामले की सीबीआई जांच की मांग की है। उनका कहना है कि रूपा तिर्की ने आत्महत्या नहीं की है, बल्कि उनकी हत्या की गई है।

उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस इसे प्रेम प्रसंग का मामला बता कर आत्महत्या का रंग दे रही है, उनकी बेटी की मौत के बाद जिस परिस्थिति में शव मिला था उससे प्रतीत होता है कि वह आत्महत्या नहीं है।

अदालत को बताया गया कि साहिबगंज में पंकज मिश्रा नामक व्यक्ति संदेह के घेरे में है जो राजनीतिक रसूख वाला है । माना जाता है कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से भी उसकी बहुत निकटता है। प्रार्थी देवानंद के अधिवक्ता ने अदालत में पंकज मिश्रा का कॉल डिटेल पेश करते हुए कहा कि पुलिस उपायुक्त, अधीक्षक और पुलिस उपाधीक्षक के साथ उसकी लगातार बात हुई है।

अदालत को बताया गया कि रूपा तिर्की कई महत्वपूर्ण मामलों की जांच कर रही थी और इसी कारण उनकी हत्या की साजिश रची गई और जिसमें पंकज मिश्रा और कुछ पुलिस वाले शामिल हैं।

सुनवाई के दौरान झारखंड उच्च न्यायालय वकील संघ की अध्यक्ष ऋतु कुमार ने कहा कि महाधिवक्ता ने अदालत में जो व्यवहार किया, यदि उसके बावजूद उनके खिलाफ अवमानना का मामला नहीं चलता है, तो कोई भी कनिष्ठ अधिवक्ता अदालत में ऐसा व्यवहार कर सकता है और ऐसे में एक गलत परंपरा शुरू हो जाएगी।

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