पणजी, 23 अगस्त गोवा के राज्यपाल पी एस श्रीधरन पिल्लई ने केरल विधानसभा द्वारा हाल में पारित किये गये उस प्रस्ताव पर बुधवार को परोक्ष सवाल उठाया जिसमें केंद्र सरकार से देश में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने से परहेज करने का अनुरोध करने को कहा गया है।
पिल्लई राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की मौजूदगी में गोवा विधानसभा के विशेष सत्र को संबोधित कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति ने भी समान नागरिक संहिता को लागू करने के लिए गोवा की तारीफ की है। उन्होंने कहा, ‘‘ अन्य राज्यों में बेटी को अपने पिता की संपत्ति में एक तिहाई हिस्सा पाने का अधिकार है जबकि बेटे को दो तिहाई हिस्सा मिलता है। इसमें महिला-पुरूष न्याय (बराबरी) कहा है? लिंग के आधार पर भेदभाव है जिसे संविधान में अनुमति नहीं दी गयी है।’’
किसी का नाम लिये बगैर पिल्लई ने कहा कि हाल में एक विधानसभा ने एक प्रस्ताव पारित किया जो उसका अधिकार है।
राज्यपाल ने सवालिये लहजे में कहा, ‘‘ मैं उसका नाम नहीं ले रहा हूं। यदि मैं उसका जिक्र करता हूं तो यह मेरे लिए भी शर्मनाक बात होगी क्योंकि मैं उसी राज्य से हूं। निश्चित ही, वे अपनी राय व्यक्त कर सकते हैं। हर व्यक्ति को अनुच्छेद 44 समेत संविधान के किसी प्रावधान एवं उस खास विषय पर अपनी राय व्यक्त करने का अधिकार है, मैं उसके विरूद्ध नहीं हूं। लेकिन क्या कोई विधानसभा प्रस्ताव पारित कर उसे (यूसीसी को) ‘ना’ कह सकती है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘ किस हद तक हमारा विधानमंडल जा रहा है? मैं नाम नहीं ले रहा हूं।’’
संविधान का अनुच्छेद 44 कहता है कि ‘‘ राज्य (देश) पूरे भारतीय परिक्षेत्र में नागरिकों के लिए समान नागरिक संहिता की कोशिश करेगा।’’
गोवा की तीन दिवसीय यात्रा पर आयीं राष्ट्रपति मुर्मू ने इस तटीय प्रदेश में ‘समान नागरिक संहिता’ के लागू होने की मंगलवार को तारीफ की थी और कहा था कि यह इस राज्य के लिए गर्व का विषय है तथा देश के लिए एक अच्छा उदाहरण है।
राज्यपाल ने यह भी कहा कि लोकतंत्र के तीनों स्तंभों को लक्ष्मण रेखा का पालन करते रहना चाहिए। उन्होंने कहा, ‘‘ बतौर राज्यपाल, मैं उसके बारे में कुछ नहीं कहना चाहता। क्या कोई अंग हमारे पूर्वजों द्वारा बनाये गये संविधान में प्रस्तावित की गयी लक्ष्मण रेखा का उल्लंघन कर सकता है? ’’
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