देश की खबरें | सरकार को जन शिकायतों को खामियों की पहचान के अवसर के रूप में लेना चाहिए: जितेंद्र सिंह

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नयी दिल्ली, नौ जुलाई केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने बुधवार को कहा कि हर साल 26 लाख से अधिक जन शिकायतें दर्ज की जाती हैं और सरकार को इन्हें नीतियों और प्रशासनिक नियमों में खामियों की पहचान करने के अवसर के रूप में लेना चाहिए।

केंद्रीय कार्मिक राज्य मंत्री ने एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जन शिकायतों के समाधान के तरीके में मूलभूत बदलाव का आह्वान किया। उन्होंने रेखांकित किया कि नागरिकों की संतुष्टि सुनिश्चित करने के लिए उनका निवारण केवल निपटान से बढ़कर होना चाहिए।

उन्होंने कहा, ‘‘शिकायत निवारण प्रणालीगत सुधार और जीवन को आसान बनाने का साधन होना चाहिए।’’

सिंह ने ‘लोक शिकायतों का प्रभावी निवारण, नेक्स्टजेन सीपीजीआरएएमएस और प्रगति समीक्षा’’ विषय पर आयोजित राष्ट्रीय कार्यशाला को संबोधित करते हुए कहा कि सरकार को शिकायतों को नीतियों और प्रशासनिक नियमों में खामियों की पहचान करने के अवसर के रूप में लेना चाहिए।

केन्द्रीकृत लोक शिकायत निवारण और निगरानी प्रणाली (सीपीजीआरएएमएस)नागरिकों को ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराने की सुविधा प्रदान करती है।

मंत्री ने भारत में शिकायत निवारण के विकास का उल्लेख करते हुए कहा कि 2014 में हर साल करीब दो लाख शिकायतें दर्ज की जाती थीं तथा इस उद्देश्य के लिए बनाई गई अनेक सरकारी वेबसाइटें अप्रयुक्त रह जाती थीं।

सिंह ने कहा, ‘‘आज, हर साल 26 लाख से अधिक शिकायतें दर्ज की जाती हैं। यह जनता के विश्वास और प्रणाली की प्रतिक्रियाशीलता में परिवर्तन को दर्शाता है।’’ उन्होंने इसका श्रेय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में नागरिक-केंद्रित डिजिटल शासन के लिए सरकार के प्रयासों को दिया।

सिंह ने भारत के शिकायत निवारण मॉडल में बढ़ती वैश्विक रुचि को रेखांकित करते हुए बताया कि बांग्लादेश, मालदीव और दक्षिण अफ्रीका जैसे देश सीपीजीआरएएमएस और डिजिटल जीवन प्रमाण पत्र प्रणाली जैसी संबंधित पहलों का अध्ययन करने के लिए अपने प्रतिनिधिमंडल भेज रहे हैं।

उन्होंने शिकायत निवारण को प्रधानमंत्री के ‘‘अधिकतम शासन, न्यूनतम सरकार’’ के दृष्टिकोण का अभिन्न अंग बताया और रेखांकित किया कि जवाबदेही, पारदर्शिता और समय पर फीडबैक नागरिकों के ‘‘जीवन को आसान बनाने’’ के लिए महत्वपूर्ण हैं।

प्रशासनिक सुधार एवं लोक शिकायत विभाग के सचिव वी. श्रीनिवास ने कहा कि सरकार ने सीपीजीआरएएमएस 7.0 के माध्यम से प्रौद्योगिकी अपनाने और प्रक्रियात्मक सुधारों में बड़ी प्रगति की है।

उन्होंने कहा, ‘‘शिकायत निवारण का समय अब ​​घटकर 15 दिन रह गया है और नागरिक संतुष्टि का स्तर 62 प्रतिशत तक पहुंच गया है। 2019 से 2025 के बीच 1.15 करोड़ से ज़्यादा शिकायतों का निवारण किया गया है।’’

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