देश की खबरें | बेलगावी में बस परिचालक के खिलाफ लड़की के परिवार ने पॉक्सो का मामला वापस लेने का फैसला किया

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. जिस नाबालिग लड़की की शिकायत पर कर्नाटक के एक बस परिचालक के खिलाफ पॉक्सो अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया था, उसके परिवार ने सोमवार को एक वीडियो बयान जारी कर कहा कि उन्होंने मामला वापस लेने का फैसला किया है और इस मामले को तूल नहीं देने का अनुरोध किया है, जो कर्नाटक और महाराष्ट्र के बीच भाषा का मुद्दा बन गया है।

बेलगावी (कर्नाटक), 25 फरवरी जिस नाबालिग लड़की की शिकायत पर कर्नाटक के एक बस परिचालक के खिलाफ पॉक्सो अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया था, उसके परिवार ने सोमवार को एक वीडियो बयान जारी कर कहा कि उन्होंने मामला वापस लेने का फैसला किया है और इस मामले को तूल नहीं देने का अनुरोध किया है, जो कर्नाटक और महाराष्ट्र के बीच का मुद्दा बन गया है।

एक यात्री को मराठी में जवाब नहीं देने पर कर्नाटक के स्वामित्व वाली परिवहन निगम की बस के परिचालक (कंडक्टर) पर हमला करने के आरोप में चार लोगों को गिरफ्तार किया गया है।

बाद में, नाबालिग लड़की ने भी शिकायत दर्ज कराई, जिसमें आरोप लगाया गया कि बस परिचालक ने उसके साथ दुर्व्यवहार किया, जिसके आधार पर परिचालक के खिलाफ यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया।

महाराष्ट्र की सीमा से लगे बेलगावी जिला मुख्यालय के बाहरी इलाके में शुक्रवार को हुई यह घटना अब दोनों राज्यों के बीच तनाव का कारण बन गई है।

परिवार द्वारा कथित तौर पर जारी किए गए एक वीडियो में, एक महिला, जिसे लड़की की मां बताया जा रहा है, ने घटना को याद करते हुए कहा कि जब उसका बेटा और बेटी अस्पताल से बेलगावी से बालेकुंडरी आ रहे थे, तो बस टिकट के मुद्दे पर विवाद हुआ, जिसे गलत तरीके से कन्नड़ और मराठी का मुद्दा बताया जा रहा है।

उन्होंने कहा, ‘‘हम कन्नड़ से भी प्यार करते हैं, इसमें कोई भेदभाव नहीं है। कन्नड़ और मराठी के नाम पर बेवजह झूठा प्रचार किया जा रहा है।’’

महिला ने कहा कि परिवार इस बात से परेशान है कि कैसे इस घटना ने दोनों राज्यों के बीच तनाव पैदा कर दिया है। उन्होंने कहा, ‘‘हम इस बात से परेशान हैं कि इस मुद्दे ने कर्नाटक और महाराष्ट्र के बीच दरार पैदा कर दी है। हमारे मन में कन्नड़ या मराठी के प्रति कोई भेदभाव नहीं है। हम भी कन्नडिगा हैं, हमारी मराठी हो सकती है।’’

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