विदेश की खबरें | हांगकांग में नए नियम लागू होने के बाद पहला परिषद चुनाव

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on world at LatestLY हिन्दी. पिछले चुनाव की तुलना में मतदान काफी कम रहने की उम्मीद है। गत चुनाव 2019 में हुआ था जब सरकार विरोधी प्रदर्शन चरम पर थे। सीधे निर्वाचित सीटों को हटाए जाने समेत चुनाव प्रक्रिया में कई बड़े बदलाव किए जाने से नाराज कुछ लोकतंत्र समर्थक मतदाताओं ने चुनाव से दूरी बनायी है।

श्रीलंका के प्रधानमंत्री दिनेश गुणवर्धने

पिछले चुनाव की तुलना में मतदान काफी कम रहने की उम्मीद है। गत चुनाव 2019 में हुआ था जब सरकार विरोधी प्रदर्शन चरम पर थे। सीधे निर्वाचित सीटों को हटाए जाने समेत चुनाव प्रक्रिया में कई बड़े बदलाव किए जाने से नाराज कुछ लोकतंत्र समर्थक मतदाताओं ने चुनाव से दूरी बनायी है।

हांगकांग सरकार ने 2019 के प्रदर्शनों के बाद अंसतुष्टों पर कार्रवाई की थी और उसके बाद नयी राजनीतिक व्यवस्था लागू की थी जिसमें केवल ‘‘देशभक्तों’’ को शासन चलाने का जिम्मा सौंपा गया।

चीन ने अर्द्ध स्वायत्त क्षेत्र में ‘‘एक देश, दो प्रणाली’’ का वादा किया था लेकिन बीजिंग द्वारा राष्ट्रीय सुरक्षा कानून लागू करने के बाद यह वादा खतरे में पड़ गया। इस कानून के तहत कई लोकतंत्र समर्थक कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी की गयी और उन्हें चुप करा दिया गया।

हांगकांग ने 2021 में विधायिका के लिए अपने चुनावी कानूनों में संशोधन किया जिससे मतदान करने की आम जनता की क्षमता काफी कम हो गयी और शहर के लिए फैसले लेने की बीजिंग समर्थक सांसदों की संख्या बढ़ गयी। इन बदलावों के बाद उस साल हुए विधायी चुनाव में मतदान 58 प्रतिशत से गिरकर 30 प्रतिशत रह गया।

रविवार सुबह वोंग ताइ सिन जिले के एक मतदान केंद्र पर केवल 30 लोग ही खड़े हुए थे।

हांगकांग के नेता जॉन ली और उनके प्रशासन ने चुनाव के लिए समर्थन जुटाने के प्रयास तेज किए हैं। सरकार ने चुनाव के लिए कई प्रचारात्मक गतिविधियां भी आयोजित की।

एपी

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