विदेश की खबरें | युगांडा से एशियाई लोगों के निष्कासन की घटना सबक के तौर पर याद की जाए : विशेषज्ञ
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on world at LatestLY हिन्दी. सुलह संबंधी मामलों के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त विशेषज्ञ मोहम्मद केशवजी ने कहा कि तानाशाह ईदी अमीन द्वारा युगांडा से 50 साल पहले हजारों एशियाई लोगों को निष्कासित किए जाने की घटना को देशवासियों द्वारा सीखे गए सबक के लिए याद किया जाना चाहिए।
जोहानिसबर्ग, 21 अगस्त सुलह संबंधी मामलों के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त विशेषज्ञ मोहम्मद केशवजी ने कहा कि तानाशाह ईदी अमीन द्वारा युगांडा से 50 साल पहले हजारों एशियाई लोगों को निष्कासित किए जाने की घटना को देशवासियों द्वारा सीखे गए सबक के लिए याद किया जाना चाहिए।
ब्रिटेन निवासी केशवजी ने कहा, ‘‘जब लोकतांत्रिक व्यवस्था ढह जाती है तो कोई भी सुरक्षित नहीं होता।’’
केशवजी खुद दो बार विस्थापन का दंश झेल चुके हैं। उनका परिवार दक्षिण अफ्रीका में दमनकारी शासन से बचने के लिए 1960 के दशक में प्रेटोरिया से केन्या चला गया था। पड़ोसी युगांड़ा में संकट सामने आने के बाद उनके परिवार को केन्या छोड़कर कनाडा जाना पड़ा था।
केशवजी युगांडा से एशियाई लोगों के निष्कासन की 50वीं वर्षगांठ को याद करने के लिए ब्रिटेन में गठित संचालन समिति के सदस्य हैं।
अमीन ने अगस्त 1972 में देश के करीब 80,000 लोगों को युगांडा से जाने के लिए मात्र 90 दिन का समय दिया था। उन्होंने एशियाई लोगों पर देश के प्रति वफादार न होने, सामाजिक एकीकरण का विरोध करने और व्यापार संबंधी कदाचार में शामिल होने का आरोप लगाया था।
इसके बाद कई एशियाई लोग ब्रिटेन, कनाडा, भारत, पाकिस्तान और केन्या जैसे देशों में चले गए थे।
केशवजी ने ‘पीटीआई-’ से कहा, ‘‘अत्याचार जाति, वर्ग, रंग या पंथ के बीच आमतौर पर कोई अंतर नहीं करता। मनुष्य पर संकट पैदा हो जाता है और उसे जहां जगह मिलती है, वह वहां शरण ढूंढता है।’’
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