देश की खबरें | एनसीईआरटी के ट्रांसजेंडर संबंधी नये मसौदा दिशानिर्देश में ‘लिंग निरपेक्षता’ पर जोर

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. औपचारिक स्कूली शिक्षा में ट्रांसजेंडर समुदाय के छात्रों के सम्मानजनक तरीके से समायोजन के लिए राष्ट्रीय शिक्षा अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) ने कुछ नए दिशा निर्देश तैयार किए हैं जिसमें ट्रांसजेंडर समावेशी पाठ्यक्रम, उनके लिए सुरक्षित शौचालय सुविधाएं तथा लैंगिकता आधारित हिंसा को रोकने के उपायों को शामिल किया गया है।

नयी दिल्ली, 17 जनवरी औपचारिक स्कूली शिक्षा में ट्रांसजेंडर समुदाय के छात्रों के सम्मानजनक तरीके से समायोजन के लिए राष्ट्रीय शिक्षा अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) ने कुछ नए दिशा निर्देश तैयार किए हैं जिसमें ट्रांसजेंडर समावेशी पाठ्यक्रम, उनके लिए सुरक्षित शौचालय सुविधाएं तथा लैंगिकता आधारित हिंसा को रोकने के उपायों को शामिल किया गया है।

एनसीईआरटी के जेंडर स्ट्डीज विभाग द्वारा गठित 16 सदस्यीय समिति ने ‘‘ स्कूली प्रक्रियाओं में ट्रांसजेंडर की चिंता का संयोजन’’ शीर्षक से तैयार मसौदा दिशानिर्देश में यह बात कही है। इसमें लिंग निरपेक्ष पोशाक व्यवस्था लागू करने का भी सुझाव दिया गया है।

इसमें कहा गया है, ‘‘ कुछ छात्र, खास तौर पर छठी कक्षा से आगे के छात्रों की स्कूली पोशाक को लेकर अपनी पसंद होती है। एक विशेष पोशाक में वे सहज नहीं महसूस करते हैं। ऐसे में स्कूल लिंग निरपेक्ष पोशाक पेश कर सकते हैं जो आरामदायक एवं जलवायु के अनुरूप हो तथा किसी लैंगिक पहचान विशेष से जुड़ी हुई न हो।’’

मसौदा दिशानिर्देश के अनुसार, विभिन्न अकादमिक, गैर अकादमिक और अन्य पदों पर लैंगिक भेदभाव के बिना ट्रांसजेंडर (तृतीय प्रकृति) शिक्षकों एवं अन्य कर्मियों की नियुक्ति की जानी चाहिए।

इसमें कहा गया है कि सभी आवेदन पत्रों एवं सभी तरह के पाठ्यक्रमों के प्रमाणपत्रों में ‘ट्रांसजेंडर’ श्रेणी को शामिल किया जाए, उनके लिए छात्रवृत्ति का प्रावधान करने के साथ ही ट्रांसजेंडर छात्रों की स्वास्थ्य देखरेख पर विशेष ध्यान दिया जाए।

इसमें साथ ही कहा गया है कि ट्रांसजेंडर श्रेणी के छात्रों की मदद के लिए प्रशिक्षित काउंसलर तैनात किए जाएं क्योंकि ऐसे छात्र एकाकीपन और परेशान किये जाने की घटनाओं का सामना करते हैं।

ट्रांसजेंडरों को लेकर स्कूली प्रक्रियाओं में उपयोग पर तैयार दिशानिर्देश में लिंग निरपेक्षता पर खास जोर दिया गया है । साथ ही जाति व्यवस्था आदि के उल्लेख से बचने का सुझाव देते हुए कहा गया है कि संबोधन या नाम पुकराने में अभद्र पूरी तरह से अस्वीकार्य है।

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