देश की खबरें | सीएससी सम्मेलन में आतंकवाद सहित अहम क्षेत्रों में सहयोग को बढ़ाने पर जोर

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कोच्चि, सात जुलाई ‘कोलंबो सिक्योरिटी कॉन्क्लेव’ (सीएससी) के उप राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार स्तर की छठवीं बैठक बृहस्पतिवार को यहां हुई जिसमें इसके सभी सदस्यों और पर्यवेक्षकों के बीच आतंकवाद की रोकथाम तथा समुद्री सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की जरूरत पर जोर दिया गया।

इस बैठक में सदस्य देशों के बीच अन्य मुद्दों पर और सहयोग बढ़ाने तथा गतिविधियों पर 2022-23 के प्रस्तावों को लागू करने पर चर्चा हुई।

इस सम्मेलन में सदस्य देशों भारत, मॉलद्वीव, मॉरिशस, श्रीलंका और दो पर्यवेक्षक राष्ट्र बांग्लादेश एवं सेशल्स ने भी हिस्सा लिया।

सभी सदस्य देशों ने समुद्री संरक्षा एवं सुरक्षा पर, आतंकवाद और कट्टरपंथ पर लगाम लगाने, तस्करी और संगठित अपराध से निपटने आदि पर सहयोग की जरूरत को रेखांकित किया।

भारत के उप राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार विक्रम मिस्री ने प्रतिनिधियों का स्वागत किया और कहा कि सम्मेलन का उद्देश्य संरक्षा और सुरक्षा के विभिन्न क्षेत्रों में सदस्य देशों के बीच सहयोग को गहरा करना और संस्थागत बनाना है।

श्रीलंका के ‘चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ’ जनरल शैवेंद्र सिल्वा ने सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि पहचाने गए खतरों के अलावा, देश समुद्र प्रदूषण के रूप में एक जटिल खतरे का सामना कर रहे हैं। यह प्रदूषण प्लास्टिक से जुड़ा है।

जनरल सिल्वा ने कहा,‘‘ हम साझा रूप से आतंकवाद, अतिवाद और सामाजिक समूहों के कट्टरपंथ से पीड़ित हैं। तेजी से आपस में जुड़ती दुनिया में समान विधारधारा वाले कट्टरपंथियों के बीच जुड़ने का चलन आम बात हो गई है।’’

उन्होंने कहा कि इन समस्याओं से निपटने के लिए संयुक्त एजेंसियों और कार्य समूहों का गठन काफी प्रभावी साबित हो सकता है।

बांग्लादेश से आया दल किन्हीं कारणों से सम्मेलन में शामिल नहीं हो सका, लेकिन दल ऑनलाइन माध्यम से सम्मेलन में उसने हिस्सा लिया।

नयी दिल्ली में बांग्लादेश उच्चायोग के रक्षा सलाहकार ब्रिगेडियर जनरल मोहम्मद अदुल कलाम आजाद ने म्यांमा से विस्थापित हुए नागरिकों के मुद्दे पर भारत का ध्यान आकर्षित करने की कोशिश की।

बांग्लादेश ने कहा,‘‘ बलपूर्वक विस्थापित किए गए म्यांमा के लोगों का सतत पुनर्वास उनके मूल देश में होना चाहिए.... सुरक्षा की समस्या बढ़ती जा रही है क्योंकि म्यांमा के हजारों युवा भविष्य की अनिश्चितताओं को देखते हुए कट्टरपंथ, तस्करी, हथियारों की खरीद फरोख्त आदि धंधों में शामिल हो रहे हैं..।’’

इस सम्मेलन को अन्य देशों के अधिकारियों ने भी संबोधित किया।

सीएससी की शुरुआत भारत, मालदीव और श्रीलंका ने 2011में की थी। इसका सचिवालय श्रीलंका के कोलंबो में है।

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