देश की खबरें | अदालत ने बिना नोटिस के श्मशान घाट को ध्वस्त करने पर जिलाधिकारी को फटकार लगायी

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मुंबई, 21 सितंबर बंबई उच्च न्यायालय ने मछुआरा समुदाय द्वारा उपयोग में लाये जा रहे समुद्र तट पर स्थित एक श्मशान घाट को बिना किसी सुनवाई के ध्वस्त किये जाने को लेकर बुधवार को मुंबई उपनगरीय जिलाधिकारी को कड़ी फटकार लगायी।

मुख्य न्यायाधीश दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति माधव जामदार ने कहा कि जिलाधिकारी निधि चौधरी कानूनों एवं नियमों से वाकिफ हैं, इसलिए वह कानून को धत्ता बताने की कोशिश कर रही हैं।

उच्च न्यायालय चेतन व्यास नामक एक स्थानीय नागरिक की जनहित याचिका पर सुनवाई कर रहा है। याचिका में मलाड उपनगर के एरांगल में श्मशान घाट के कथित अनधिकृत निर्माण को लेकर चिंता प्रकट की गयी है। उसमें दावा किया है कि इस निर्माण से तटीय विनियमन क्षेत्र (सीआरजेड) का उल्लंघन किया गया है।

इस माह के प्रारंभ में उच्च न्यायालय को बताया गया था कि उच्च न्यायालय की अन्य पीठ द्वारा संयुक्त निरीक्षण का आदेश दिये जाने के बावजूद श्मशान घाट को ध्वस्त कर दिया गया। अदालत को बताया कि इस कार्रवाई से पूर्व मछुआरा समुदाय को कोई कारण बताओ नोटिस जारी नहीं किया गया या उसका पक्ष नहीं सुना गया।

जिलाधिकारी ने अदालत से कहा कि वह महाराष्ट्र तटीय क्षेत्र प्रबंधन प्राधिकरण (एमसीजेडएमए) के निर्देशों का पालन कर रही हैं। हालांकि प्राधिकरण ने दावा किया कि उसने तो जिलाधिकारी कार्यालय से बस जांच करने एवं कार्रवाई करने को कहा था।

पीठ ने बुधवार को कहा कि एक अन्य मामले में उच्च न्यायालय ने इन्हीं जिलाधिकारी को हवाई अड्डे के समीप ऊंचाई पाबंदियों का उल्लंघन करने को लेकर भवनों के विरूद्ध कार्रवाई करने का निर्देश दिया था।

न्यायमूर्ति दत्ता ने कहा, ‘‘ इन्हीं जिलाधिकारी ने तब बिल्कुल भिन्न रूख अपनाया था। उन्हें (चौधरी को) तब कई कठिनाइयां थीं। तब भी उन पर अदालत का आदेश था लेकिन उसके बाद भी उनके कई सवाल थे। तब हमने कोई कार्रवाई नहीं की थी।’’

अदालत ने कहा, ‘‘ लेकिन यहां देखिए। वह जिलाधिकारी हैं। वह इतनी अनाड़ी तो नहीं हो सकती हैं कि वह एमसीजेडएमए को यह नहीं कह सकतीं कि मछुआरों का पक्ष पहले सुनना होगा और तथ्यान्वेषी जांच करनी होगी। ’’

अदालत ने बिना जांच के श्मशान घाट को ध्वस्त करने के लिए पत्र जारी करने को लेकर एमसीजेडएमए की भी खिंचाई की। पीठ ने कहा, ‘‘ क्या जांच के लिए पहले अधिकारी को नियुक्त करना एमसीजेडएमए का दायित्व नहीं है।’’

अदालत ने श्मशान घाट के मृत्यु रजिस्टर पर भी गौर किया जो दर्शाता है कि सीआरजेड नियमों की अधिसूचना फरवरी, 1991 में जारी होने से पहले ही यह श्मशान घाट वहां है।

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