देश की खबरें | व्लॉगर के बच्चे को लेख में घसीटने पर अदालत ने अखबार को फटकारा, मीडिया से स्व-नियमन की बात कही

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. दिल्ली उच्च न्यायालय ने एक अखबार के लेख में एक व्लॉगर के बच्चे को घसीटे जाने पर नाराजगी जताते हुए मंगलवार को कहा कि वह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को ‘‘अच्छी तरह’’ समझता है और मीडिया को स्व-नियमन करना चाहिए। इसने कहा कि आलोचना ऐसी होनी चाहिए जो उचित एवं निष्पक्ष हो।

नयी दिल्ली, दो अगस्त दिल्ली उच्च न्यायालय ने एक अखबार के लेख में एक व्लॉगर के बच्चे को घसीटे जाने पर नाराजगी जताते हुए मंगलवार को कहा कि वह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को ‘‘अच्छी तरह’’ समझता है और मीडिया को स्व-नियमन करना चाहिए। इसने कहा कि आलोचना ऐसी होनी चाहिए जो उचित एवं निष्पक्ष हो।

न्यायमूर्ति सिद्धार्थ मृदुल और न्यायमूर्ति अमित शर्मा की पीठ ने कहा कि बच्चे दुष्प्रचार के पीड़ित नहीं बनाए जाने चाहिए।

पीठ ने कहा, "आप उसके बारे में जो चाहें कह सकते हैं। लेकिन यह कहकर उसके परिवार को निशाना न बनाएं और बच्चे की मानसिक स्थिति को लेकर टिप्पणी न करें... मुद्दा यह है कि हम उस बच्चे के किसी भी संदर्भ से पूरी तरह से नाखुश हैं।"

अदालत ने कहा, “हम अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को पूरी तरह से समझते हैं। लेकिन यह स्व-नियमन है और हम ऐसा नहीं कह रहे हैं। उच्चतम न्यायालय की एक संविधान पीठ ने जब मीडिया को विनियमित करने के मुद्दे पर विचार किया, तो इसने स्व-नियमन की बात कही थी। इसलिए, हम उम्मीद करते हैं कि आप अपने आपको विनियमित करें।”

अदालत ने इस बात पर जोर दिया कि किसी को कार्रवाई की आलोचना करनी चाहिए, न कि व्यक्ति की।

पीठ ने कहा, "कृपया इस पर बहस करें लेकिन इसे बच्चों तक न ले जाएं। आपको उनकी टिप्पणी अरुचिकर लगती है तो कृपया आगे बढ़ें और अपने विचार व्यक्त करें लेकिन इसे इससे आगे न ले जाएं। ”

न्यायमूर्ति मृदुल ने कहा कि जब भी कोई अदालत कोई आदेश पारित करती है, तो आलोचना आदेश की होनी चाहिए, न कि न्यायाधीशों की।

उन्होंने कहा, “हमें सूचित किया जाता है, हम नहीं जानते, कि हमारे (न्यायाधीशों) के बारे में बहुत कुछ कहा जाता है और यह हम तक सीमित नहीं है। हम इसकी सराहना नहीं करते....आप आदेश की आलोचना करते हैं। आप हमारी आलोचना नहीं करते। यह उचित और निष्पक्ष आलोचना है।”

अदालत अखबार की एक अपील पर सुनवाई कर रही थी जिसमें एकल न्यायाधीश के उस आदेश को चुनौती दी गई थी जिसमें कथित आपत्तिजनक लेख को हटाने का निर्देश दिया गया था।

अखबार की ओर से पेश हुए वकील ने कहा कि व्लॉगर एक "सार्वजनिक व्यक्ति" है जिसकी "आजीविका इंटरनेट पर उसके और उसके परिवार के वीडियो पोस्ट करने पर आधारित है।" उन्होंने कहा कि लेख में उस आलोचना का जिक्र है जो उसे अपने आचरण के लिए कई अन्य लोगों से मिली है।

अदालत ने उल्लेख किया कि लेख में व्लॉगर को "महिलाओं से द्वेष रखने वाला" और "बच्चों से दुर्व्यवहार करने वाला" कहा गया है। इसने अपीलकर्ता से पूरे रिकॉर्ड के साथ एकल न्यायाधीश से संपर्क करने को कहा।

अदालत ने कहा, “हम थोड़े व्यथित हैं कि आप किसी के बच्चे का जिक्र कर रहे हैं। बच्चा किसी दुष्प्रचार का शिकार न हो। आप आदमी के बारे में जो कहना चाहते हो हो...लेकिन उसके बच्चों को न घसीटें। यह परेशान करने वाला है। हमें यह बहुत आपत्तिजनक लगा।”

इसने कहा, "बच्चों तक न जाएं। उन्होंने कुछ नहीं किया है। परिवार या बच्चों को न घसीटें, ऐसा न करें।’’

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