देश की खबरें | अदालत ने सरकारी आवास पर अवैध कब्जे के खिलाफ पीआईएल दाखिल करने के सोसायटी की मंशा पर सवाल उठाया

दिल्ली, आठ जुलाई दिल्ली उच्च न्यायालय ने बुधवार को सेवानिवृत्त सरकारी सेवकों, खासतौर पर फॉरवर्ड मार्केट एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष द्वारा सरकारी आवास पर अवैध कब्जे के खिलाफ जनहित याचिका दायर करने वाली सोसायटी की मंशा पर सवाल उठाये।

मुख्य न्यायाधीश डी एन पटेल और न्यायमूर्ति प्रतीक जालान की पीठ ने सोसायटी -चेन्नई फाइनेंशियल मार्केट्स एंड अकाउंटेबिलिटी को एक हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया जिसमें बताया जाए कि वह सदाशय रखती है और फॉरवर्ड मार्केट कमीशन के पूर्व अध्यक्ष के खिलाफ कोई निजी द्वेष नहीं रखती।

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पीठ ने जानना चाहा कि सरकारी मकान पर सेवानिवृत्त अधिकारियों के गैरकानूनी कब्जे जैसे मुद्दे को लेकर दायर याचिका में सिर्फ फॉरवर्ड मार्केट एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष का ही नाम क्यों शामिल किया गया है।

पीठ ने सोसायटी को अपनी संस्था के संस्थापन के प्रलेख और इसका विवरण पेश करने का भी निर्देश दिया और कहा कि वह इसके उद्देश्यों को देखना चाहती है।

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पीठ ने सोसायटी को अदालत में दो सप्ताह में 35 हजार रुपये जमा कराने का भी निर्देश दिया ताकि यह याचिका खारिज होने की स्थिति में उस सेवानिवृत्त लोक सेवक को यह राशि दी जा सके जिनका नाम याचिका में खासतौर पर लिया गया है।

इस निर्देश के साथ ही अदालत ने सोसायटी की याचिका की सुनवाई 23 जुलाई के लिये स्थगि कर दी।

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