देश की खबरें | अदालत ने शिकायतकर्ता के अनुरोध पर पीछा करने का मामला रद्द किया, आरोपी पर 30 हजार रुपये का जुर्माना

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. दिल्ली उच्च न्यायालय एक व्यक्ति के खिलाफ पीछा करने के मामले को रद्द करने पर सहमत हो गया और उस पर 30 हजार रुपये का जुर्माना लगाया। शिकायतकर्ता महिला ने कहा था कि वह इस मामले को आगे नहीं बढ़ाना चाहती।

नयी दिल्ली, चार अक्टूबर दिल्ली उच्च न्यायालय एक व्यक्ति के खिलाफ पीछा करने के मामले को रद्द करने पर सहमत हो गया और उस पर 30 हजार रुपये का जुर्माना लगाया। शिकायतकर्ता महिला ने कहा था कि वह इस मामले को आगे नहीं बढ़ाना चाहती।

अदालत ने कहा कि चूंकि दोनों पक्षों ने आपस में समझौता कर लिया है और अब कोई विवाद लंबित नहीं है, इसलिए वह आश्वस्त है कि समझौते की वजह से इस कार्यवाही को रद्द करने से शांति आएगी ।

न्यायमूर्ति जसमीत सिंह ने एक हालिया आदेश में कहा, “इसे कानूनी मिसाल नहीं माना जाना चाहिए और इस मामले में कार्यवाही समाप्त की जाती है क्योंकि प्रतिवादी ने मामले को खत्म करने का अनुरोध किया है।’’

उन्होंने हालांकि कहा कि उनका मानना है कि पुलिस और न्यायपालिका का काफी समय इसमें व्यतीत हुआ है क्योंकि प्राथमिकी 2020 में दर्ज की गई और आरोप पत्र भी पहले ही दायर किया जा चुका है।

अदालत ने कहा कि दोनों पक्षों के कृत्यों की वजह से पुलिस के उपयोगी समय का अन्यत्र उपयोग किया गया है जबकि उसका उपयोग महत्वपूर्ण मामलों के लिए किया जा सकता था। इसलिए, याचिकाकर्ता (पुरुष) को कुछ सामाजिक कार्य करना चाहिए।

उच्च न्यायालय ने प्राथमिकी रद्द कर दी और आरोपी पर 30,000 रुपये का जुर्माना लगाया। इसमें से 20,000 रुपये दिल्ली राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (डीएसएलएसए) को तथा 10,000 रुपये महिला को दिए जाएंगे।

अदालत ने कहा कि जुर्माने की राशि का भुगतान किए जाने का प्रमाण चार सप्ताह के अंदर अदालत की रजिस्ट्री में दाखिल किया जाना चाहिए और ऐसा न होने की स्थिति में ‘केस फाइल’ को अदालत में पेश किया जाए।

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