देश की खबरें | उच्चतम न्यायालय में शेष रिक्तियां भरने की सीजेआई ललित नीत कॉलेजियम की कोशिश अधूरी रह गई

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. उच्चतम न्यायालय में शेष चार रिक्तियों को भरने की कवायद अधूरी रह गई क्योंकि प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) उदय उमेश ललित नीत पांच सदस्यीय कॉलेजियम की बैठक शीर्ष न्यायालय के वरिष्ठतम न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति एस ए नजीर की आपत्तियों के चलते बेनतीजा रही।

नयी दिल्ली, 10 अक्टूबर उच्चतम न्यायालय में शेष चार रिक्तियों को भरने की कवायद अधूरी रह गई क्योंकि प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) उदय उमेश ललित नीत पांच सदस्यीय कॉलेजियम की बैठक शीर्ष न्यायालय के वरिष्ठतम न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति एस ए नजीर की आपत्तियों के चलते बेनतीजा रही।

नियुक्ति के प्रस्ताव पर लिखित सहमति मांगने के विषय पर यह आपत्ति जताई गई थी।

न्यायमूर्ति ललित ने 49वें प्रधान न्यायाधीश के तौर पर 27 अगस्त 2022 को पद की शपथ ली थी और वह आठ नवंबर को सेवानिवृत्त होंगे। उनके सेवानिवृत्त होने में एक महीना से भी कम समय रह गया है।

यह परंपरा रही है कि निवर्तमान प्रधान न्यायाधीश अपना कार्यकाल एक महीने से भी कम शेष रह जाने पर कॉलेजियम की चर्चा के जरिये न्यायाधीशों की नियुक्ति का मुद्दा अपने उत्तराधिकारी के लिए छोड़ देते हैं।

विभिन्न उच्च न्यायालयों में करीब 20 न्यायाधीशों की नियुक्ति के अलावा सीजेआई नीत कॉलेजियम ने हाल में बंबई उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश दीपांकर दत्ता को शीर्ष न्यायालय के न्यायाधीश के तौर पर पदोन्नत करने की सिफारिश की थी।

इसने कुछ उच्च न्यायालयों के न्यायाधीशों को मुख्य न्यायाधीशों के रूप में पदोन्नत करने के अलावा कुछ अन्य मुख्य न्यायाधीशों एवं न्यायाधीशों के स्थानांतरण की सिफारिश की थी।

हालांकि, शीर्ष न्यायालय में शेष रह गई चार रिक्तियों को भरने के लिए नामों की सिफारिश करने की उसकी कोशिश का कोई निष्कर्ष नहीं निकल सका क्योंकि ‘सर्कुलेशन’ पद्धति से नामों पर सहमति मांगने की प्रक्रिया को लेकर न्यायामूर्ति चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति नजीर ने आपत्ति जताई।

शीर्ष न्यायालय में अभी तीन महिला न्यायाधीशों सहित 29 न्यायाधीश हैं, जबकि आवंटित संख्या 34 है।

एक अभूतपूर्व घटनाक्रम में, उच्चतम न्यायालय कॉलेजियम ने पैनल के उन दो न्यायाधीशों के नाम सार्वजनिक कर दिए हैं, जिन्होंने शीर्ष न्यायालय में न्यायाधीशों की नियुक्ति पर अपने सदस्यों के विचारों को जानने के लिए अपनाए गए ‘सर्कुलेशन’ (पदोन्नति के लिये विचाराधीन न्यायाधीशों के फैसले कॉलेजियम के सदस्यों को वितरित करके उनकी राय जानने) के तरीके पर आपत्ति जताई थी।

सोमवार को, सार्वजनिक हुए नौ अक्टूबर को जारी एक बयान में कॉलेजियम ने कहा कि न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति नजीर ने ‘सर्कुलेशन’ के तरीके पर आपत्ति जताई थी। इसका इस्तेमाल कार्यवाही में प्रत्यक्ष रूप से भाग लेने में असमर्थ सदस्यों के विचार जानने के लिये पहली बार किया गया।

परंपरा के मुताबिक, शीर्ष न्यायालय के वरिष्ठतम न्यायाधीश न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ के अगले सीजेआई बनने के, व्यापक स्तर पर कयास लगाये जा रहे हैं।

(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)

Share Now