देश की खबरें | अध्यक्ष ने जगन रेड्डी के पत्र की निंदा के प्रस्ताव पर ईसी की बैठक से स्वयं को अलग किया: एससीबीए सचिव

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. उच्चतम न्यायालय के वकीलों की संस्था एससीबीए के अध्यक्ष दुष्यंत दवे ने आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री जगन मोहन रेड्डी द्वारा प्रधान न्यायाधीश एस ए बोबडे को लिखे पत्र की निंदा करने के लिए प्रस्ताव पारित करने की प्रक्रिया से स्वयं को अलग कर लिया है।

एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

नयी दिल्ली, 19 अक्टूबर उच्चतम न्यायालय के वकीलों की संस्था एससीबीए के अध्यक्ष दुष्यंत दवे ने आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री जगन मोहन रेड्डी द्वारा प्रधान न्यायाधीश एस ए बोबडे को लिखे पत्र की निंदा करने के लिए प्रस्ताव पारित करने की प्रक्रिया से स्वयं को अलग कर लिया है।

रेड्डी ने पत्र में उच्चतम न्यायालय के एक मौजूदा न्यायाधीश के खिलाफ आरोप लगाए हैं।

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सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (एससीबीए) के सचिव रोहित पांडे ने इस मामले पर कार्यकारी समिति (ईसी) में कथित मतभेद संबंधी मीडिया रिपोर्ट के बारे में पूछे जाने पर सोमवार को बताया कि दवे का इस शुरुआती चरण में प्रस्ताव पारित करने को लेकर ‘‘सैद्धांतिक रूप से’’ अलग नजरिया है।

दवे ने कथित रूप से कहा था कि बार को इन आरोपों की सच्चाई के बारे में कोई जानकारी नहीं है और इस चरण पर इस प्रकार का प्रस्ताव पारित करना जल्दबाजी होगी।

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पांडे ने कहा कि हालांकि अधिकतर सदस्य आरोपों को सार्वजनिक करने के रेड्डी के कृत्य की निंदा करने के समर्थन में हैं।

उन्होंने कहा कि दवे ने बैठक में भाग नहीं लेने के लिए ईसी की मंजूरी मांगी थी, जिसके बाद उसकी अध्यक्षता एससीबीए उपाध्यक्ष कैलाश वासुदेव ने की।

एससीबीए सचिव ने बताया कि वासुदेव की अध्यक्षता वाली बैठक में ‘‘सर्वसम्मति’’ से प्रस्ताव पारित किया गया।

उन्होंने कहा कि अध्यक्ष को छोड़कर ईसी के सभी सदस्य पत्र की निंदा करने संबंधी प्रस्ताव पारित करने के पक्ष में थे।

गौरतलब है कि न्यायालय के वकीलों की संस्था एससीबीए ने रेड्डी द्वारा भारत के प्रधान न्यायाधीश को पत्र लिखे जाने की आलोचना की है।

एससीबीए ने अपने प्रस्ताव में कहा कि “परिपाटी के विपरीत संवैधानिक पदाधिकारियों के ऐसे कृत्य भारत के संविधान में निहित न्यायापालिका की स्वतंत्रता को प्रभावित करने वाली गंभीर दखलअंदाजी हैं।”

इससे पहले वकीलों की एक अन्य संस्था सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट्स-ऑन-रिकॉर्ड एसोसिएशन (एससीएओआरए) ने भी रेड्डी द्वारा लिखे पत्र को “अवांछित” तरीके से जारी किये जाने की निंदा करते हुए कहा था कि यह “न्यायपालिका की स्वतंत्रता का हनन और उसकी बदनामी करने वाला है।”

एससीएओआरए के इस प्रस्ताव के कुछ दिनों बाद ही एससीबीए का यह प्रस्ताव आया है।

एससीबीए के प्रस्ताव में कहा गया कि उसकी कार्यकारी समिति ने 16 अक्टूबर को एक बैठक में प्रधान न्यायाधीश को लिखे पत्र को आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री द्वारा जारी किये जाने के कृत्य की कड़े शब्दों में निंदा की थी। दिल्ली हाईकोर्ट बार एसोसिएशन (डीएससीबीए) भी इस हफ्ते इस पत्र की आलोचना कर चुकी है।

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