देश की खबरें | भाजपा सरकार अच्छी नीति का विरोध करती है और फिर जनता के दबाव में उसे अपनाती है: कांग्रेस

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. कांग्रेस ने शुक्रवार को कहा कि जातिगत गणना पर सरकार का फैसला उसके उन तरीकों के अनुरूप है जिसमें पहले तो वह हर अच्छी योजना या नीति का विरोध करती है, उन्हें बदनाम करती है और फिर जनता के दबाव एवं हकीकत का सामना करने पर उन्हीं नीतियों को अपना लेती है।

नयी दिल्ली, दो मई कांग्रेस ने शुक्रवार को कहा कि जातिगत गणना पर सरकार का फैसला उसके उन तरीकों के अनुरूप है जिसमें पहले तो वह हर अच्छी योजना या नीति का विरोध करती है, उन्हें बदनाम करती है और फिर जनता के दबाव एवं हकीकत का सामना करने पर उन्हीं नीतियों को अपना लेती है।

कांग्रेस महासचिव (संचार) जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार केवल जनता का ध्यान भटकाने, वास्तविक मुद्दों से दूर भागने और अपने विभाजनकारी एजेंडे को आगे बढ़ाने में माहिर है।

उन्होंने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ‘‘इसके अलावा उनके पास न तो कोई नीति है और न ही कोई नीयत - केवल झूठ, दुष्प्रचार और नफरत की राजनीति है।’’

रमेश ने कहा, ‘‘जाति जनगणना-जिसे मोदी सरकार ने बरसों तक दबाने की कोशिश की-आखिरकार विपक्ष के नेता राहुल गांधी, कांग्रेस पार्टी और असंख्य सामाजिक कार्यकर्ताओं, संगठनों की अडिग लड़ाई के आगे वह झुक गई। यह सामाजिक न्याय की लड़ाई में एक अहम पड़ाव है।’’

उन्होंने कहा कि मोदी सरकार, जो कल तक इसके नाम से भी कतराती थी और उपहास उड़ाने, टालमटोल करने में कोई कसर नहीं छोड़ रही थी, आज जनता के भारी दबाव और विपक्ष के संघर्ष के आगे झुककर जाति जनगणना कराने पर राजी हो गई है।’’

रमेश ने कहा, ‘‘असल में यही भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार का ‘पैटर्न’ रहा है - पहले हर अच्छी योजना या नीति का विरोध करो, उसे बदनाम करो… और जब जनता का दबाव और हकीकत का सामना करना पड़े तो उसी नीति को अपना लो।’’

कांग्रेस नेता ने कहा, ‘‘याद कीजिए, मनरेगा को लेकर प्रधानमंत्री ने संसद में क्या कहा था- ‘‘विफलता का स्मारक’’। जिस योजना को दुनिया ने ग्रामीण रोजगार और गरीबी उन्मूलन का एक मॉडल कहा, उसी मनरेगा का मजाक उड़ाया गया, कहा गया कि लोग गड्ढे खोद रहे हैं। लेकिन जब कोविड-19 महामारी जैसी आपदा आई तो यही मनरेगा देश के गरीबों की रीढ़ बन गया। तब क्या हुआ? सरकार ने इसका बजट भी बढ़ाया और खुद इसका श्रेय लेने की कोशिश भी की।’’

रमेश ने कहा कि ऐसा ही ‘आधार’ के साथ हुआ। उन्होंने कहा कि जब भाजपा विपक्ष में थी तब यही कहती थी कि ‘‘यह निजता के लिए खतरा है और सिर्फ एक ‘राजनीतिक स्टंट’ है’’, लेकिन सत्ता में आते ही उसी आधार को पूरे कल्याणकारी तंत्र की नींव बना दिया।

रमेश ने कहा, ‘‘माल एवं सेवा कर (जीएसटी) की कहानी भी अलग नहीं है। कांग्रेस ने जब जीएसटी लाने की पहल की तो भाजपा ने इसका जोरदार विरोध किया, कहा कि यह राज्यों के हितों के खिलाफ है। लेकिन सत्ता में आते ही, बिना बड़े बदलाव के, इसे लागू कर दिया और फिर इसे ‘‘गेम चेंजर’’ बताकर वे खुद की वाहवाही करने लगे।’’

उन्होंने कहा कि प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) की व्यवस्था कांग्रेस ने बनाई थी ताकि सब्सिडी सीधे जनता के खाते में पहुंचे।

रमेश ने कहा, ‘‘उस समय भाजपा ने इसे नकारा था और कहा था, ‘‘यह चलेगा नहीं।’’ लेकिन सत्ता में आते ही पूरे देश में इसी डीबीटी को लागू किया और ‘‘डिजिटल इंडिया’’ का ढोल पीटने लगे।’’

उन्होंने कहा, ‘‘महिलाओं को नकद सहायता देने की नीति कांग्रेस ने शुरू की थी। भाजपा ने तब कहा था-‘‘ये तो बस घोषणाओं की राजनीति है।’’ आज वही सरकार महिलाओं के लिए अलग-अलग नकद हस्तांतरण योजनाएं चला रही है।’’

इंटर्नशिप/अप्रेंटिसशिप स्कीम के बारे में उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने 2024 के लोकसभा चुनाव के अपने ‘न्यायपत्र’ में युवा न्याय के तहत ‘अप्रेंटिसशिप स्कीम’ का वादा किया था।

रमेश ने कहा, ‘‘चुनाव के दौरान भाजपा ने उस पर भी तंज कसा था। लेकिन बाद में वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट में इसकी घोषणा की। अफसोस, आज तक वह भी सिर्फ घोषणा बनकर ही रह गई है।’’

उन्होंने कहा कि यह लिस्ट (सूची) यहीं खत्म नहीं होती... असल में यह तो बस, कुछ उदाहरण भर हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘सच्चाई यह है कि इस सरकार के पास न कोई अपना ‘विजन’ है और न ही समस्याओं के समाधान की कोई दिशा। यह सरकार सिर्फ जनता का ध्यान भटकाने, असली मुद्दों से भागने और अपने विभाजनकारी एजेंडे को आगे बढ़ाने में ही माहिर है। इसके अलावा इनके पास न कोई नीति है, न नीयत -सिर्फ झूठ, प्रचार और नफरत की राजनीति है।’’

कांग्रेस ने बृहस्पतिवार को दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ‘‘बिना समय सीमा के सुर्खियां बनाने में माहिर हैं।’’ पार्टी ने पहलगाम आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की मांग के मद्देनजर जाति जनगणना के सरकार के फैसले को ‘‘ध्यान भटकाने की रणनीति’’ बताया।

रमेश ने कहा था कि इस फैसले को लेकर कई सवाल उठते हैं, खासकर सरकार की मंशा पर। उन्होंने पूछा कि जनगणना कराने की ‘‘समय सीमा क्यों नहीं बताई गई है’’।

केंद्र ने बुधवार को घोषणा की कि जातिगत गणना अगली जनगणना का हिस्सा होगी, जिसके तहत आजादी के बाद पहली बार जाति विवरण शामिल किया जाएगा।

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