देश की खबरें | नेताजी की मातृभूमि पर प्रतीक की लड़ाई

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कोलकाता, 20 जनवरी भारत की 'क्रांतिकारी राजधानी' एक अलग तरह की लड़ाई का केंद्र बन गई है जहां राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस), तृणमूल कांग्रेस, फॉरवर्ड ब्लॉक और कांग्रेस के बीच स्वतंत्रता आंदोलन के महानायक सुभाष चंद्र बोस को अपना-अपना प्रतीक बनाने को लेकर प्रतिस्पर्धा दिखाई दे रही है।

कुछ कोलकातावासियों के लिए काफी हद तक, आरएसएस संभवतः अपने इतिहास में पहली बार प्रतिष्ठित शहीद मीनार क्षेत्र में बोस की जयंती मनाने के लिए एक बड़ी रैली आयोजित करेगा।

शहीद मीनार स्थल भारत की आजादी से पहले और बाद में कई रैलियों का गवाह रहा है जिनमें से कुछ रैलियों को खुद नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने संबोधित किया था।

आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत पहले ही कोलकाता पहुंच चुके हैं और वह 23 जनवरी के सार्वजनिक कार्यक्रम में मुख्य वक्ता होंगे। यह कार्यक्रम उसी समय आयोजित होने की संभावना है जब मुख्यमंत्री ममता बनर्जी बोस की प्रतिमा पर माल्यार्पण करेंगी। रेड रोड पर स्थित इस प्रतिमा में नेताजी हाथ से दिल्ली की तरफ इशारा करते दिखते हैं।

स्वाभाविक रूप से, आरएसएस के इस कदम पर विचारक, टीएमसी, कांग्रेस और कम्युनिस्ट अपने-अपने हिसाब से टिप्पणियां कर रहे हैं।

प्रख्यात इतिहासकार और भारत के स्वतंत्रता संग्राम पर कई पुस्तक लिख चुके प्रोफेसर आदित्य मुखर्जी ने कहा, "धर्मनिरपेक्ष, लोकतांत्रिक सिद्धांतों की उनकी विचारधारा, ब्रिटिश शासन के प्रति उनका (बोस) कट्टर विरोध आरएसएस और हिंदू महासभा के बिलकुल विपरीत था, और उन्होंने अपने जीवनकाल में यह स्पष्ट कर दिया था।"

कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस और नेताजी द्वारा स्थापित फॉरवर्ड ब्लॉक द्वारा नेताजी की जयंती पर कई कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे जिनके लिए बड़े पैमाने पर तैयारियां की जा रही हैं।

नेताजी सुभाष चंद्र बोस कांग्रेस के दो बार अध्यक्ष रहे थे।

तृणमूल सांसद सुखेंदु शेखर रॉय ने कहा कि सभी राजनीतिक दल नेताजी को अपना-अपना प्रतीक बनाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन इसके लिए उन्हें उनके आदर्शों पर खरा उतरना होगा।

हिंदुत्व संगठन का दावा है कि बोस और आरएसएस के संस्थापक डॉ. हेडगेवार के बीच आजादी से पहले मुलाकात हुई थी और संगठन कई वर्षों से नेताजी को श्रद्धांजलि दे रहा है।

एल्गिन रोड पर नेताजी भवन में राजनीतिक चर्चा से दूर नेताजी के रिश्तेदार प्रोफेसर सुगाता बोस द्वारा एक कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा, जहां आजाद हिंद फौज के सेनानियों के परिवारों के सदस्य उपस्थित होंगे। इस कार्यक्रम में ए आर रहमान की केएम म्यूजिक कंजर्वेटरी के सूफी कलाकार प्रस्तुति देंगे।

प्रोफेसर बोस ने कार्यक्रम में व्यस्तता का हवाला देते हुए जहां टिप्पणी करने से इनकार किया, वहीं, नेताजी की एक अन्य रिश्तेदार और 'द बोस ब्रदर्स एंड इंडियन इंडिपेंडेंस' की लेखिका माधुरी बोस ने कहा कि क्रांतिकारी का ‘‘पूरा जीवन हमारे देश के समावेशी और धर्मनिरपेक्ष चरित्र का उदाहरण है।’’

उन्होंने कहा कि नेताजी को श्रद्धांजलि देने के लिए सभी का स्वागत है, लेकिन बोस के विश्वास पर खरा उतरना ही सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

कटक में 23 जनवरी 1897 को पैदा हुए बोस ने अपना अधिकांश जीवन कोलकाता में गुजारा था।

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