एजेंसी न्यूज

देश की खबरें | ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ पोस्ट साझा करने के आरोपी की जमानत याचिका खारिज

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने फेसबुक पर ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ पोस्ट साझा करने के आरोपी अंसार अहमद की जमानत याचिका खारिज कर दी है।

देश की खबरें | ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ पोस्ट साझा करने के आरोपी की जमानत याचिका खारिज

प्रयागराज, 30 जून इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने फेसबुक पर ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ पोस्ट साझा करने के आरोपी अंसार अहमद की जमानत याचिका खारिज कर दी है।

अदालत ने कहा कि राष्ट्र विरोधी मामलों के प्रति न्यायपालिका की सहनशीलता से इस तरह के मामलों की संख्या बढ़ रही है।

अंसार अहमद सिद्दीकी (62) को जमानत देने से इनकार करते हुए न्यायमूर्ति सिद्धार्थ ने कहा, ‘‘इस तरह के अपराध इस देश में नियमित मामले बनते जा रहे हैं क्योंकि अदालतें, राष्ट्र विरोधी मानसिकता वाले व्यक्तियों के ऐसे कृत्य के प्रति उदार और सहनशील हैं।’’

अदालत ने कहा, ‘‘याचिकाकर्ता का यह कृत्य स्पष्ट रूप से संविधान का अपमान है और भारत विरोधी पोस्ट साझा करना भारत की संप्रभुता को चुनौती देने जैसा और भारत की अखंडता को बुरी तरह से प्रभावित करने वाला है।’’

अदालत ने कहा, ‘‘ याचिकाकर्ता एक वरिष्ठ नागरिक है और उसकी उम्र बताती है कि वह स्वतंत्र भारत में जन्मा है। उसका गैर जिम्मेदारी भरा और राष्ट्र विरोधी आचरण उसे संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत स्वतंत्रता के अधिकार के संरक्षण का पात्र नहीं बनाता।’’

हालांकि, अदालत ने यह निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता के खिलाफ निचली अदालत में मुकदमे की सुनवाई जितनी जल्द हो सके, उतनी जल्दी पूरी की जाए।

सिद्दीकी के खिलाफ बुलंदशहर जिले के छतरी थाने में बीएनएस की धारा 197 (राष्ट्रीय एकता को कमजोर करने वाला कृत्य), 152 (भारत की संप्रभुता, एकता और अखंडता को खतरे में डालने वाला कृत्य) के तहत मामला दर्ज किया गया था।

सुनवाई के दौरान, याचिकाकर्ता के वकील ने दलील दी कि याचिकाकर्ता ने तीन मई, 2025 को फेसबुक पर केवल वीडियो साझा किया। वह एक बुजुर्ग व्यक्ति है और उसका इलाज चल रहा है।

वहीं दूसरी ओर, सरकारी वकील ने जमानत याचिका का यह कहते हुए विरोध किया कि याचिकाकर्ता का आचरण देश के हित के खिलाफ है और वह जमानत पर रिहा होने का पात्र नहीं है।

उन्होंने यह भी कहा कि यह वीडियो श्रीनगर में आतंकियों द्वारा 26 लोगों की नृशंस हत्या किए जाने के बाद पोस्ट किया गया था। इसलिए यह साफ तौर पर साबित है कि याचिकाकर्ता ने धार्मिक आधार पर आतंकियों के कृत्य का समर्थन किया।

दोनों पक्षों को सुनने के बाद अदालत ने 26 जून के अपने आदेश में कहा कि भारत के प्रत्येक नागरिक का यह कर्तव्य है कि वह संविधान का पालन करे और भारत की संप्रभुता, एकता और अखंडता का सम्मान करे।

(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)

(The above story first appeared on LatestLY on Jun 30, 2025 10:48 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).